इलाहाबाद हाईकोर्ट में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की अग्रिम जमानत याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई निर्धारित है। झूंसी थाने में दर्ज यौन उत्पीड़न के मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। कोर्ट नंबर 72 की फ्रेश कॉज लिस्ट में यह मामला क्रम संख्या 142 पर सूचीबद्ध है और इसकी सुनवाई न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ में होने की संभावना है।
इस बीच, पूरे मामले को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है और विभिन्न पक्षों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। शंकराचार्य के समर्थन में उतरे दिनेश फलाहारी महाराज ने आरोप लगाने वाले छात्रों और आशुतोष पांडेय का नार्को टेस्ट कराने की मांग की है। उन्होंने इस संबंध में राष्ट्रपति को पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच की अपील की है। उनका कहना है कि मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए वैज्ञानिक जांच आवश्यक है।
फलाहारी महाराज ने यह भी दावा किया है कि उन्हें एक अज्ञात मोबाइल नंबर से धमकियां दी गई हैं और उन्हें भी झूठे मामले में फंसाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि शंकराचार्य के खिलाफ साजिश रची गई है और कुछ लोग जानबूझकर उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने आशुतोष पांडेय पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह कथित रूप से आपराधिक पृष्ठभूमि का व्यक्ति रहा है और इस पूरे विवाद के पीछे उसकी भूमिका हो सकती है।
दूसरी ओर, शिकायतकर्ताओं की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की बात कही जा रही है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अग्रिम जमानत पर हाईकोर्ट का फैसला इस मामले की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
गौरतलब है कि यह मामला सामने आने के बाद धार्मिक और सामाजिक हलकों में भी चर्चा का विषय बना हुआ है। समर्थकों और विरोधियों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है, जिससे विवाद और गहराता दिख रहा है। अब सभी की नजरें हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को राहत मिलती है या नहीं, यह तय होगा। अदालत के फैसले के बाद मामले की कानूनी प्रक्रिया और जांच की दिशा भी स्पष्ट हो सकेगी।
Correspondent – Shanwaz Khan


