साल 2026 की शुरुआत सोने और चांदी के बाजार के लिए उत्साहजनक नहीं रही। नए साल के पहले ही दिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव में नरमी और घरेलू बाजार में हल्की गिरावट दर्ज की गई है। लगातार बढ़ते दामों के बीच यह गिरावट उपभोक्ताओं के लिए राहत भरा संकेत मानी जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट का असर
वैश्विक स्तर पर सोने का हाजिर भाव 4,308.30 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है, जो पिछली दरों की तुलना में कम है। इसका सीधा असर भारतीय बाजारों में भी देखा गया, जहां सोने-चांदी की कीमतों में कुछ गिरावट आई। विश्लेषकों का कहना है कि डॉलर में मजबूती और निवेशकों की मुनाफावसूली के कारण सोने की मांग में मामूली कमी आई है।
दिल्ली और मुंबई में ताज़ा रेट
1 जनवरी 2026 को दिल्ली में 24 कैरेट सोना 1,35,030 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 1,23,790 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बिक रहा है। वहीं, आर्थिक राजधानी मुंबई में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,34,880 रुपये और 22 कैरेट का भाव 1,23,640 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया है।
कोलकाता, चेन्नई और हैदराबाद जैसे प्रमुख महानगरों में भी दाम लगभग समान हैं। इन शहरों में 24 कैरेट सोना 1,34,880 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,23,640 रुपये प्रति 10 ग्राम की दर से बिक रहा है। इस मामूली गिरावट के बावजूद, सोना अभी भी अपने ऐतिहासिक उच्च स्तरों के करीब बना हुआ है।
चांदी की कीमतों में भी गिरावट
सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी कमजोरी आई है। 1 जनवरी को चांदी का भाव घटकर 2,38,900 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया है। हालांकि यह गिरावट सीमित रही, लेकिन पिछले एक साल में चांदी ने जबरदस्त प्रदर्शन किया है। 2025 के दौरान चांदी की कीमतों में लगभग 170 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई थी, जिससे यह निवेशकों के लिए एक प्रमुख विकल्प बन गई थी।
पिछले साल का निवेश रिटर्न शानदार रहा
विश्लेषकों के अनुसार, बीते साल सोने ने लगभग 70 प्रतिशत और तांबे ने 35 से 40 प्रतिशत तक का रिटर्न दिया। निवेशकों के लिए सोना और चांदी दोनों ही सुरक्षित निवेश साधन के रूप में काम करते हैं। हालांकि, नए साल की शुरुआत में वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता आने और डॉलर की मजबूती के चलते निवेशक फिलहाल मुनाफावसूली के मूड में हैं।
कीमतें तय होने की प्रक्रिया
भारत में सोने-चांदी के दाम रोज़ाना तय होते हैं और इसके पीछे कई आर्थिक कारक काम करते हैं। सबसे बड़ी भूमिका डॉलर और रुपये के बीच के विनिमय दर की होती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें डॉलर में तय की जाती हैं, इसलिए जब डॉलर मजबूत होता है या रुपया कमजोर पड़ता है, तो घरेलू बाज़ार में सोना महंगा हो जाता है।
इसके अलावा, सीमा शुल्क, आयात शुल्क (Import Duty), जीएसटी और स्थानीय कर दरों में बदलाव भी कीमतों को प्रभावित करते हैं। भारत अपनी खपत का अधिकांश सोना आयात करता है, इसलिए किसी भी तरह की टैक्स वृद्धि सीधे आम उपभोक्ता की जेब पर असर डालती है। इसके विपरीत, टैक्स में कटौती होने पर कीमतों में कुछ राहत आती है।
अंतरराष्ट्रीय संकेतों का प्रभाव
वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियाँ भी सोने-चांदी के रुझान को तय करती हैं। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध, आर्थिक मंदी या ब्याज दरों में बदलाव जैसी स्थितियाँ बनती हैं, तो निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर रुख करते हैं। ऐसे में सोने और चांदी की मांग अचानक बढ़ जाती है, जिससे उनकी कीमतें आसमान छूने लगती हैं।
निवेशकों के लिए सलाह
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा समय में सोने की कीमतों में थोड़ी नरमी निवेश के लिए सुनहरा अवसर हो सकता है। हालांकि, आने वाले महीनों में वैश्विक आर्थिक नीतियों, ब्याज दरों और डॉलर इंडेक्स में होने वाले उतार-चढ़ाव पर निगाह रखना ज़रूरी होगा।
1 जनवरी 2026 की गिरावट को बाज़ार विशेषज्ञ “स्वाभाविक सुधार” मान रहे हैं। आने वाले हफ्तों में यदि अंतरराष्ट्रीय संकेत स्थिर रहे, तो सोने-चांदी की कीमतें दोबारा रफ्तार पकड़ सकती हैं। आम उपभोक्ताओं के लिए यह समय समझदारी से खरीदारी करने का है — क्योंकि सोने की चमक भले ही कुछ फीकी पड़ी हो, लेकिन उसकी अहमियत कभी खत्म नहीं होती।
Corrospondent – Shanwaz khan


