दुबई एयरशो 2025 में शुक्रवार दोपहर एक बड़ी घटना सामने आई है, जिसके बाद भारत में तीव्र प्रतिक्रियाएँ पैदा हो गई हैं। कार्यक्रम में प्रदर्शन के दौरान भारत का हल्का लड़ाकू विमान HAL तेजस Mk1 कथित तौर पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यह हादसा स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 2:10 बजे अल मक्तूम अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर हुआ।
जाँच-पड़ताल और स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना के तुरंत बाद धुँए की मोटी काली लपटें उठती देखी गईं, और वहां उपस्थित दर्शकों ने चीख-पुकार के बीच भागकर अपनी जान बचाई। हालांकि, प्रारंभ में यह स्पष्ट नहीं था कि पायलट सुरक्षित बाहर निकल पाया या नहीं।
सरकार का पलटवार — ‘तेल लीक‘ सिर्फ गलत दावा
इसी बीच सोशल मीडिया पर तेजस विमान की दुर्घटना से जुड़ी एक और कहानी भी वायरल हुई — कुछ वीडियो में विमान से तरल रिसाव दिखाया गया और दावा किया गया कि यह तेल लीक है।
लेकिन भारत सरकार ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वायरल वीडियो में जो तरल दिखाई दे रहा है, वह तेल नहीं है, बल्कि विमान के Environmental Control System (ECS) और On-Board Oxygen Generating System (OBOGS) में संकुचित पानी का सामान्य रूप से ड्रेनिंग किया जा रहा है।
पीआईबी (Press Information Bureau) के फेक्ट-चेक यूनिट ने सोशल मीडिया पर इसको गलत और भ्रामक बताया है, और कहा है कि यह सिर्फ एक नियंत्रित प्रक्रिया है, न कि कोई तकनीकी खराबी।
असर और प्रतिक्रिया
- यह घटना भारत की रक्षा क्षमताओं के सामने एक संभावित आलोचनात्मक स्थिति पेश करती है, खासकर जब तेजस जेट को विदेशी बाजारों में निर्यात की दिशा में बढ़ावा दिया जा रहा है।
- सरकार की सफाई से यह भी स्पष्ट होता है कि वह किसी भी ऐसे प्रचार को गंभीरता से ले रही है, जिसका मकसद देश के रक्षा संस्थानों की विश्वसनीयता पर असर डालना हो।
- साथ ही, अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही वीडियो या रिपोर्ट्स को साझा करने से पहले तथ्यों की जाँच करें, ताकि अफवाहों और गलत सूचनाओं को बढ़ावा न मिले।
निष्कर्ष
दुबई एयरशो में तेजस जेट का कथित क्रैश एक गंभीर घटना है, जिसने न सिर्फ वायु सु-सुरक्षा की चुनौतियों को दोबारा उजागर किया है, बल्कि भारत की रक्षा निर्यात महत्वाकांक्षा को भी परीक्षण में ला दिया है। लेकिन सरकार की ओर से किया गया स्पष्टिकरण यह दर्शाता है कि कम से कम “तेल रिसाव” का जो दावा किया गया था, वह वास्तविकता पर आधारित नहीं था, बल्कि एक नियमित परिचालन प्रक्रिया थी। जांच-पड़ताल जारी है और आगे की गहराई से जाँचना अभी बाकी है कि वास्तव में क्या हुआ था।
Correspondent – Shanwaz Khan


