लखनऊ में नगर निगम द्वारा झुग्गी-झोपड़ी इलाकों में चलाए गए चेकिंग अभियान को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा घुसपैठियों पर कार्रवाई के निर्देश के बाद मेयर के नेतृत्व में एक टीम ने शहर के एक अस्थायी बस्ती क्षेत्र का निरीक्षण किया। इस दौरान 15 दिनों के भीतर झुग्गियां खाली करने का आदेश जारी किया गया, जिसके बाद स्थानीय लोगों और विपक्षी दलों में नाराज़गी बढ़ गई है।
कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज आलम ने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि इस तरह की जांच का अधिकार मेयर को नहीं है। उन्होंने सवाल उठाते हुए पूछा कि मेयर किस भूमिका में लोगों के दस्तावेजों की जांच कर रही थीं और क्या यह जिम्मेदारी सरकारी एजेंसियों की नहीं होती? उनका कहना है कि यदि केंद्र सरकार की एजेंसियों द्वारा जारी दस्तावेज मान्य नहीं माने जा रहे, तो यह सीधे तौर पर नागरिकों की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न है।
शाहनवाज आलम ने बताया कि जब वे मौके पर पहुंचे, तो वहां रहने वाले लोगों ने अपनी समस्याएं साझा कीं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, वे लगभग दो दशक से इस जगह पर रह रहे हैं और शहर में सफाई जैसे कार्यों से अपनी जिंदगी चला रहे हैं। उनका कहना है कि उनके पास पहचान से जुड़े सभी जरूरी कागजात, एनआरसी से संबंधित डॉक्यूमेंट तक मौजूद हैं, फिर भी उन्हें “घुसपैठिया” कहकर हटाने की बात कही जा रही है। कुछ निवासियों ने यह आरोप भी लगाया कि मेयर के साथ आए कुछ लोगों ने उनके साथ अभद्रता और लूटपाट की।
लोगों ने दावा किया कि वे असम के बरपेटा जिले के मूल निवासी हैं और वर्षों से लखनऊ में मेहनत-मजदूरी कर रहे हैं। लेकिन उनकी बात सुने बिना इलाके को खाली करने का आदेश देना उन्हें असुरक्षित और अपमानित महसूस करा रहा है।
कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक मंशा से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार उत्तर प्रदेश में ऐसा माहौल बना रही है जिससे असम और पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी चुनावों को प्रभावित किया जा सके। शाहनवाज आलम ने आरोप लगाया कि निर्दोष लोगों को चिन्हित कर डिटेंशन सेंटर भेजने जैसी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
मामला अब राजनीतिक रंग ले चुका है, और कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे को राज्य स्तर पर उठाएगी। Meanwhile, स्थानीय लोग मेयर के फैसले पर पुनर्विचार और उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।
Correspondent – Shanwaz khan


