Monday, March 2, 2026
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बिहार चुनाव 2025: 83 सीटों पर NDA और महागठबंधन दोनों का खेल बिगाड़ सकते हैं प्रशांत किशोर, सर्वे में सामने आई चौंकाने वाली तस्वीर

पॉलिटिकल डेस्क, पटना।
बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राज्य की 243 सीटों पर दो चरणों में चुनाव होंगे — पहले चरण में 6 नवंबर को 121 सीटों पर मतदान होगा, जबकि दूसरे चरण में 11 नवंबर को बाकी 122 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। नतीजे 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे।

इस बीच, वोट वाइब (Vote Vibe) के ताज़ा सर्वे ने बिहार की सियासत में नई हलचल मचा दी है। सर्वे के मुताबिक, प्रशांत किशोर (PK) की पार्टी जनसुराज राज्य की करीब 83 सीटों पर NDA और महागठबंधन (MGB) दोनों के समीकरण बिगाड़ सकती है।


 NDA में सीट बंटवारा तय, महागठबंधन में अभी पेच

एनडीए में सीटों का बंटवारा लगभग तय हो गया है, जबकि महागठबंधन में अब भी सहमति नहीं बन पाई है। इस बीच प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी ने 51 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है, जिससे मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।


🔹 सर्वे के आंकड़े: PK का वोट शेयर घटा लेकिन असर बरकरार

वोट वाइब के फाउंडर अमिताभ तिवारी के अनुसार, फरवरी में जनसुराज का वोट शेयर थोड़ा बढ़ा था, लेकिन अब यह घटकर करीब 9% के आसपास आ गया है।
हालांकि, इस गिरावट के बावजूद प्रशांत किशोर कई सीटों पर किंगमेकर की भूमिका निभा सकते हैं, क्योंकि NDA और महागठबंधन के बीच वोट मार्जिन बेहद कम है।

तिवारी के मुताबिक,

“प्रशांत किशोर की पार्टी 15–20% वोट शेयर लाने में सफल होती है तभी चुनाव त्रिकोणीय कहलाएगा। फिलहाल उनका प्रभाव सीमित है, लेकिन 5% वोट शेयर भी कई सीटों का समीकरण बदल सकता है।”


 किसका वोट काट रहे हैं प्रशांत किशोर?

सर्वे बताता है कि जनसुराज का असर मुख्य रूप से निर्दलीय और छोटी पार्टियों के वोट बैंक पर पड़ रहा है।
बिहार में अब तक 8–10% वोट शेयर ऐसे मतदाताओं का रहा है जो किसी बड़े गठबंधन से नहीं जुड़ते।
अब यह वोट बैंक प्रशांत किशोर के पक्ष में शिफ्ट होता दिख रहा है, क्योंकि वे एंटी-NDA और एंटी-महागठबंधन मतदाताओं को एक विकल्प दे रहे हैं।


 83 सीटों पर 5% मार्जिन वाला मुकाबला

अमिताभ तिवारी के अनुसार, बिहार की लगभग 83 सीटों पर जीत का अंतर (मार्जिन) 5% से कम है।
अगर इन सीटों पर जनसुराज को सिर्फ 5% वोट शेयर भी मिलता है, तो वह किसी न किसी गठबंधन का खेल बिगाड़ देगा।
पीके का एजेंडा इस बार अलग है —

  • शिक्षा और नौकरियों पर फोकस करके वे तेजस्वी यादव के “युवाओं के नेता” वाले ब्रांड को चुनौती दे रहे हैं।
  • भ्रष्टाचार के मुद्दे उठाकर NDA और BJP को घेर रहे हैं।
  • और राजनीतिक वैकल्पिक चेहरे के रूप में जनसुराज को मजबूत बना रहे हैं।

किन 83 सीटों पर असर होगा?

सर्वे में जिन 83 सीटों पर असर की बात कही गई है, उनके नाम अभी स्पष्ट नहीं किए गए हैं।
अमिताभ तिवारी का कहना है कि यह तय करने के लिए पहले जनसुराज के उम्मीदवारों की जातीय समीकरण, शैक्षणिक पृष्ठभूमि और स्थानीय पकड़ जैसे फैक्टर्स देखे जाएंगे।

उन्होंने कहा —

“प्रशांत किशोर बार-बार कह रहे हैं कि जेडीयू की 25 सीटें नहीं आएंगी और नीतीश कुमार सीएम नहीं बनेंगे। अब देखना होगा कि वे सिर्फ जेडीयू को नुकसान पहुंचाने पर फोकस करते हैं या फिर पूरे गठबंधन को।”

यह स्थिति कुछ वैसी ही बनती दिख रही है जैसी पिछली बार चिराग पासवान ने बनाई थी, जब उन्होंने अपने उम्मीदवार सिर्फ जेडीयू के खिलाफ उतारे थे।


निष्कर्ष: तीसरे मोर्चे की भूमिका में PK

बिहार की राजनीति में प्रशांत किशोर का प्रवेश अब थर्ड फ्रंट की तरह असर डाल सकता है।
हालांकि फिलहाल जनसुराज की पकड़ सीमित है, लेकिन 83 सीटों पर उनका वोट शेयर NDA और महागठबंधन दोनों के लिए सिरदर्द बन सकता है।
अगर चुनाव प्रचार के अंतिम हफ्तों में PK की रैलियों को ग्राउंड सपोर्ट मिलता है, तो बिहार चुनाव का नतीजा चौंकाने वाला हो सकता है।

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