असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma से जुड़े कथित मुस्लिम-विरोधी वीडियो विवाद का मामला अब सीधे Supreme Court of India तक पहुंच गया है। इस मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश Surya Kant ने एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि जैसे ही चुनाव नजदीक आते हैं, वैसे ही सुप्रीम कोर्ट में भी राजनीतिक लड़ाइयां शुरू हो जाती हैं।
यह टिप्पणी उस समय आई जब याचिकाकर्ताओं की ओर से वीडियो विवाद को लेकर तत्काल सुनवाई की मांग की गई। कोर्ट ने संकेत दिया कि वह मामले की सुनवाई के लिए तैयार है, लेकिन साथ ही चुनावी माहौल में अदालतों के दुरुपयोग की प्रवृत्ति पर चिंता भी जताई।
क्या है पूरा मामला
हिमंत बिस्व सरमा के खिलाफ यह विवाद 7 फरवरी को सामने आया, जब असम बीजेपी के सोशल मीडिया हैंडल से एक वीडियो पोस्ट किया गया। कुछ ही देर बाद यह वीडियो हटा लिया गया, लेकिन तब तक वह सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका था।
वीडियो में मुख्यमंत्री को हाथ में राइफल लिए दिखाया गया था। इसके साथ एआई तकनीक से तैयार किया गया एक हिस्सा जोड़ा गया था, जिसमें दाढ़ी और सफेद टोपी पहने दो लोगों की तस्वीरों पर गोलियां चलते हुए दिखाई गईं। विपक्ष ने आरोप लगाया कि यह वीडियो एक विशेष समुदाय को निशाना बनाता है और नफरत फैलाने वाला है।
वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। संसद में भी इस मुद्दे को लेकर हंगामा हुआ और बीजेपी पर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का आरोप लगाया गया।
सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं
इस विवाद को लेकर Communist Party of India (Marxist) और सीपीआई नेता Annie Raja ने सुप्रीम कोर्ट में अलग-अलग रिट याचिकाएं दाखिल की हैं। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि हिमंत बिस्व सरमा ने नफरती भाषण और सांप्रदायिक बयानबाजी के जरिए एक समुदाय को निशाना बनाया।
याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि मुख्यमंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए और पूरे मामले की जांच के लिए एक स्वतंत्र स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया जाए। याचिका में यह भी कहा गया है कि राज्य और केंद्र सरकार की एजेंसियों से निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती।
वकील की दलील
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए एडवोकेट निजाम पाशा ने कोर्ट को बताया कि हिमंत बिस्व सरमा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है, लेकिन अब तक एफआईआर नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से जुड़ा वीडियो न सिर्फ आपत्तिजनक है, बल्कि समाज में नफरत फैलाने वाला भी है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट का तत्काल हस्तक्षेप जरूरी है।
CJI की टिप्पणी और रुख
वकील की दलीलें सुनने के बाद CJI सूर्यकांत ने कहा कि कोर्ट मामले की सुनवाई करेगा और तारीख भी तय की जाएगी। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब चुनाव करीब आते हैं, तो राजनीतिक विवादों का एक हिस्सा अदालतों तक पहुंचने लगता है। यह टिप्पणी मौजूदा राजनीतिक माहौल और न्यायपालिका पर बढ़ते दबाव की ओर इशारा करती है।
आगे क्या?
अब सुप्रीम कोर्ट की ओर से इस मामले में सुनवाई की तारीख तय की जाएगी। देखना होगा कि कोर्ट SIT के गठन और एफआईआर दर्ज करने की मांग पर क्या रुख अपनाता है। फिलहाल यह विवाद चुनावी राजनीति, सोशल मीडिया और न्यायपालिका—तीनों के केंद्र में आ चुका है।
Correspondent – Shanwaz Khan


