Tuesday, March 31, 2026
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गैस संकट के बीच भारत सरकार की प्राथमिकता सूची जारी: पहले किसे मिलेगा सिलेंडर?

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान-अमेरिका-इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष का असर अब पूरी दुनिया पर दिखने लगा है। खबरों के मुताबिक ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट बंद किए जाने से तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो रही है। भारत जैसे देश, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर हैं, वहां भी गैस की संभावित कमी को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसी स्थिति को देखते हुए भारत सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय ने नेचुरल गैस की आपूर्ति को लेकर एक स्पष्ट प्राथमिकता सूची तैयार की है, ताकि संकट की स्थिति में जरूरी सेक्टरों को पहले गैस मिल सके।

सरकार का कहना है कि अगर गैस की कमी होती है तो सबसे पहले आम जनता की जरूरतों को सुरक्षित रखा जाएगा। इसलिए घरेलू उपयोग से जुड़े सेक्टरों को 100 प्रतिशत गैस आपूर्ति देने का फैसला किया गया है। इसमें सबसे पहले घरों में इस्तेमाल होने वाली पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को रखा गया है। यह वही गैस है जो सीधे पाइपलाइन के जरिए घरों की रसोई तक पहुंचती है और खाना बनाने में इस्तेमाल होती है। सरकार का मानना है कि लोगों की दैनिक जरूरतों को प्रभावित नहीं होने देना सबसे जरूरी है।

इसके अलावा CNG यानी कम्प्रेस्ड नेचुरल गैस को भी पूरी प्राथमिकता दी गई है। CNG का इस्तेमाल बड़ी संख्या में कारों, ऑटो-रिक्शा और सार्वजनिक परिवहन में होता है। अगर इसमें कटौती होती है तो शहरों में परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है, इसलिए सरकार ने इसे भी सुरक्षित श्रेणी में रखा है।

तीसरा अहम क्षेत्र है घरेलू LPG सिलेंडर का उत्पादन। रसोई गैस बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली गैस की आपूर्ति भी पूरी तरह जारी रखी जाएगी। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि घरों में खाना बनाने के लिए सिलेंडर की उपलब्धता बनी रहे। इसके अलावा गैस पाइपलाइनों को चलाने के लिए जरूरी ईंधन की सप्लाई भी पूरी तरह बरकरार रखी जाएगी, ताकि गैस वितरण की व्यवस्था बाधित न हो।

हालांकि, गैस की कमी की स्थिति में कुछ औद्योगिक क्षेत्रों को कम आपूर्ति मिल सकती है। सरकार ने तय किया है कि इंडस्ट्री से जुड़े सेक्टरों को उनके पिछले कुछ महीनों के औसत इस्तेमाल के आधार पर सीमित गैस दी जाएगी। उदाहरण के तौर पर चाय उद्योग और अन्य मैन्युफैक्चरिंग सेक्टरों को उनकी पिछले छह महीनों की औसत खपत का लगभग 80 प्रतिशत गैस ही उपलब्ध कराई जाएगी।

इसी तरह फर्टिलाइजर यानी खाद बनाने वाली कंपनियों को करीब 70 प्रतिशत गैस दी जाएगी, जबकि तेल रिफाइनरीज को लगभग 65 प्रतिशत आपूर्ति मिल सकती है। सरकार का मानना है कि इस तरह की कटौती से घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देना संभव होगा।

इस बीच होटल और रेस्टोरेंट से जुड़े संगठनों ने चिंता जताई है कि अगर कमर्शियल गैस की सप्लाई कम हुई तो कई शहरों में होटल कारोबार प्रभावित हो सकता है। कुछ उद्योग संगठनों का कहना है कि गैस की कमी से उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।

दरअसल भारत अपनी LPG जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है और इसका अधिकांश भाग मिडिल ईस्ट से होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आता है। मौजूदा तनाव के कारण सप्लाई चेन पर असर पड़ा है। हालांकि सरकार ने भरोसा दिलाया है कि फिलहाल देश में करीब 40 दिनों का LPG स्टॉक मौजूद है।

इसके साथ ही भारत अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया जैसे अन्य देशों से गैस और LPG के वैकल्पिक आयात बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। सरकार ने रिफाइनरीज को घरेलू गैस उत्पादन बढ़ाने के निर्देश भी दिए हैं। वहीं घरेलू सिलेंडर की बुकिंग के बीच का अंतराल 21 दिनों से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है ताकि स्टॉक को संतुलित रखा जा सके।

सरकार का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। अगर संकट लंबा खिंचता है तो आगे और कदम उठाए जा सकते हैं, लेकिन फिलहाल कोशिश यही है कि आम लोगों को गैस की कमी का सामना न करना पड़े।

Correspondent – Shanwaz Khan

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