Tuesday, March 31, 2026
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तेल-गैस के बाद इंटरनेट पर खतरा, मिडिल ईस्ट तनाव से भारत समेत दुनिया चिंतित

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब केवल तेल और गैस आपूर्ति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क पर भी पड़ने की आशंका बढ़ गई है। ईरान से जुड़े घटनाक्रम के चलते समुद्र के नीचे बिछी फाइबर ऑप्टिक केबलों पर खतरा मंडरा रहा है, जो पूरी दुनिया की डिजिटल व्यवस्था की रीढ़ मानी जाती हैं।

खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और बाब अल-मंडेब जैसे रणनीतिक समुद्री रास्ते इस समय सबसे ज्यादा संवेदनशील माने जा रहे हैं। ये दोनों क्षेत्र न केवल ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि इनके नीचे इंटरनेट केबलों का बड़ा नेटवर्क भी मौजूद है, जो एशिया, यूरोप और अफ्रीका को आपस में जोड़ता है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, होर्मुज के आसपास समुद्र में ऐसी गतिविधियों की आशंका जताई जा रही है, जिससे जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। वहीं लाल सागर क्षेत्र में ईरान समर्थित हूथी समूह लगातार जहाजों को निशाना बना रहे हैं। इन हालातों से उन समुद्री केबलों को भी खतरा बढ़ गया है, जिनके जरिए दुनिया का अधिकांश इंटरनेट डेटा ट्रांसफर होता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ये केबलें हजारों किलोमीटर लंबी होती हैं और इनके माध्यम से वीडियो कॉल, ईमेल, ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेवाएं संचालित होती हैं। अगर इनमें किसी तरह की क्षति होती है, तो इसका सीधा असर आम लोगों से लेकर बड़ी कंपनियों तक सभी पर पड़ेगा।

जानकारी के मुताबिक, लाल सागर और होर्मुज क्षेत्र में करीब 20 प्रमुख इंटरनेट केबलें गुजरती हैं। इनमें से अधिकांश केबलें यूरोप, एशिया और अफ्रीका के बीच डेटा ट्रांसमिशन का प्रमुख माध्यम हैं। भारत के लिए भी ये केबलें बेहद अहम हैं, क्योंकि इन्हीं के जरिए अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट कनेक्टिविटी मजबूत रहती है।

आज के डिजिटल युग में दुनिया की अर्थव्यवस्था काफी हद तक इंटरनेट पर निर्भर हो चुकी है। Amazon, Microsoft और Google जैसी बड़ी टेक कंपनियों के डेटा सेंटर मिडिल ईस्ट में मौजूद हैं, जो इन समुद्री केबलों से जुड़े हुए हैं। ऐसे में यदि इन केबलों को नुकसान पहुंचता है, तो न केवल इंटरनेट सेवाएं बाधित होंगी, बल्कि वैश्विक व्यापार, वित्तीय लेनदेन और तकनीकी सेवाओं पर भी गहरा असर पड़ेगा।

कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट का यह बढ़ता तनाव अब डिजिटल दुनिया के लिए भी गंभीर खतरा बनता जा रहा है, जिससे भारत समेत पूरी दुनिया सतर्क नजर आ रही है।

Correspondent – Shanwaz Khan

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