महाराष्ट्र बोर्ड की 12वीं कक्षा की केमिस्ट्री परीक्षा से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग और प्रशासन में हड़कंप मच गया है। नागपुर के एक परीक्षा केंद्र से कथित तौर पर प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर सर्कुलेट होने की सूचना मिली है, जिसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि परीक्षा शुरू होने से पहले प्रश्नपत्र के व्हाट्सऐप ग्रुप में साझा किए जाने की बात सामने आई है, जिससे परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार, यह घटना नागपुर शहर के एक परीक्षा केंद्र की है, जहां महाराष्ट्र स्टेट बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एंड हायर एजुकेशन द्वारा आयोजित 12वीं की केमिस्ट्री परीक्षा चल रही थी। परीक्षा के दौरान ड्यूटी पर तैनात पर्यवेक्षकों को एक छात्रा की गतिविधियां संदिग्ध लगीं। बताया जा रहा है कि छात्रा बार-बार वॉशरूम जाने की अनुमति मांग रही थी, जिससे परीक्षकों को शक हुआ। आमतौर पर परीक्षा के दौरान इस तरह का व्यवहार असामान्य माना जाता है, इसलिए पर्यवेक्षकों ने उस पर विशेष नजर रखनी शुरू कर दी।
संदेह गहराने पर छात्रा की तलाशी ली गई, जिसमें उसके पास से मोबाइल फोन बरामद हुआ। परीक्षा केंद्र में मोबाइल ले जाना नियमों के खिलाफ है, इसलिए अधिकारियों ने तुरंत फोन की जांच की। जांच के दौरान मोबाइल में एक व्हाट्सऐप ग्रुप मिला, जिसमें परीक्षा शुरू होने से पहले ही केमिस्ट्री का कथित प्रश्नपत्र साझा किया गया था। इतना ही नहीं, उसी ग्रुप में संभावित उत्तर भी भेजे गए थे, जिससे मामला और गंभीर हो गया।
प्रारंभिक जांच से संकेत मिला है कि प्रश्नपत्र सोशल मीडिया के माध्यम से तेजी से फैलाया गया। व्हाट्सऐप जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर प्रश्नपत्र और उत्तर प्रसारित होने की जानकारी ने परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिकारियों का मानना है कि यदि समय रहते इस पर संदेह नहीं किया जाता, तो बड़ी संख्या में छात्र अनुचित लाभ उठा सकते थे और परीक्षा की विश्वसनीयता पर गहरा असर पड़ता।
छात्रा से पूछताछ के बाद पुलिस को एक अन्य छात्र के बारे में भी जानकारी मिली है। उसके बयान के आधार पर एक और विद्यार्थी से पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला किसी एक छात्र तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि इसके पीछे संगठित तरीके से काम करने वाला नेटवर्क भी हो सकता है, जो परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक कराने में शामिल हो।
जांच के दौरान एक निजी कोचिंग संस्थान की भूमिका को लेकर भी आशंका जताई जा रही है। पुलिस को कुछ ऐसे सुराग मिले हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि कथित तौर पर पैसे लेकर प्रश्नपत्र पहले ही छात्रों तक पहुंचाया गया हो सकता है। हालांकि, इस संबंध में अभी आधिकारिक तौर पर किसी संस्था या व्यक्ति का नाम सामने नहीं आया है और जांच जारी है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए नागपुर के सदर थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की गहराई से जांच की जा रही है, डिजिटल साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है और व्हाट्सऐप ग्रुप से जुड़े सभी लोगों की पहचान की जा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि पेपर लीक की पुष्टि होती है, तो इसमें शामिल सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उधर, प्रश्नपत्र लीक की आशंका सामने आने के बाद शिक्षा विभाग भी पूरी तरह सतर्क हो गया है। विभाग ने सभी परीक्षा केंद्रों को निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था और अधिक कड़ी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग, सख्त तलाशी और तकनीकी निगरानी जैसे उपायों को और मजबूत करने पर भी विचार किया जा रहा है। इस घटना ने एक बार फिर बोर्ड परीक्षाओं की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है।
Correspondent – Shanwaz Khan


