संसद का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से शुरू हो गया है, जो 19 दिसंबर तक चलेगा। सत्र के पहले दिन राज्यसभा में नए सभापति सी.पी. राधाकृष्णन का स्वागत करते हुए राजनीतिक बयानबाज़ी भी देखने को मिली। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने सभापति को संबोधित करते हुए सदन में निष्पक्षता बनाए रखने की सलाह दी और इसी क्रम में भाजपा पर परोक्ष हमला भी बोला।
खरगे ने सत्ता पक्ष की ओर संकेत करते हुए कहा, “मुझे उम्मीद है कि आप दोनों तरफ बराबर ध्यान देंगे। केवल एक तरफ ज़्यादा देखने में खतरा है और अगर दूसरी तरफ कम देखेंगे तो भी खतरा है। इसलिए बेहतर होगा कि आप सदन में संतुलन बनाए रखें।” उनकी इस टिप्पणी को विपक्ष द्वारा सत्ता पक्ष पर लगातार हावी रहने के आरोप के संदर्भ में देखा जा रहा है।
अपने भाषण में खरगे ने पूर्व उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के पूर्व सभापति जगदीप धनखड़ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि धनखड़ को विधिवत विदाई का अवसर न मिलना दुखद है। उनके इस बयान पर भाजपा सांसदों ने आपत्ति जताई। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि खरगे ने अनावश्यक टिप्पणी की है, जो उचित नहीं थी।
इसके बाद खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वक्तव्य पर भी पलटवार किया। पीएम मोदी ने सुबह सदन के आरंभ में विपक्ष पर आरोप लगाया था कि वह चुनावी हार से उपजी हताशा को संसद में प्रकट करता है। इस पर जवाब देते हुए खरगे ने कहा कि प्रधानमंत्री मुख्य मुद्दों पर बात करने के बजाय “ड्रामेबाज़ी” कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा को ध्यान भटकाने की रणनीति छोड़कर जनता की समस्याओं पर सार्थक चर्चा करनी चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा था कि शीतकालीन सत्र को ‘राजनीतिक रंगमंच’ नहीं बनाना चाहिए, बल्कि यह रचनात्मक संवाद और ठोस परिणामों का मंच बने। वहीं विपक्ष का आरोप है कि सरकार बहस से बचती है और महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की अनुमति नहीं देती।
इस तरह शीतकालीन सत्र की शुरुआत ही तीखी टिप्पणी, जवाबी बयान और राजनीतिक तंजों के साथ हुई, जिससे आने वाले दिनों में सदन की कार्यवाही और गरम होने के संकेत मिल रहे हैं।
Correspondent – Shanwaz Khan


