संविधान दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों को संबोधित करते हुए देश में लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत बनाने की अपील की। बुधवार (26 नवंबर) को जारी एक विशेष पत्र में पीएम मोदी ने कहा कि भारत के हर नागरिक को अपने संवैधानिक कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करना चाहिए, क्योंकि यही एक सशक्त और विकसित भारत के निर्माण की आधारशिला है। उन्होंने विशेष रूप से उन युवाओं का उल्लेख किया जो 18 वर्ष के हो रहे हैं और पहली बार मतदान करने जा रहे हैं। पीएम मोदी ने स्कूलों और कॉलेजों से आग्रह किया कि वे ऐसे नए मतदाताओं का सम्मान करें और उन्हें लोकतंत्र में भागीदारी के लिए प्रेरित करें।
पहली बार वोट करने वालों को मिले सम्मान
प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि संविधान दिवस को और सार्थक बनाने के लिए शैक्षणिक संस्थान 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले और पहली बार मताधिकार प्राप्त करने वाले युवाओं का सार्वजनिक रूप से सम्मान करें। उन्होंने कहा कि इससे युवाओं में न केवल लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, बल्कि उन्हें अपने अधिकारों और कर्तव्यों के महत्व का भी एहसास होगा। मोदी ने कहा, “मतदान केवल अधिकार नहीं, बल्कि लोकतंत्र को सशक्त बनाने की जिम्मेदारी भी है।”
कर्तव्य और अधिकार—दोनों का संतुलन आवश्यक
पत्र में पीएम मोदी ने महात्मा गांधी के उस विचार का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि अधिकारों की प्राप्ति कर्तव्यों के पालन से होती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के नागरिक यदि अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक हों, तो सामाजिक और आर्थिक प्रगति और तेजी से आगे बढ़ेगी। उन्होंने लिखा कि भारत इस समय विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है और ऐसे समय में हर नागरिक का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मोदी ने कहा कि आज लिए जा रहे निर्णय और नीतियां आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का निर्धारण करेंगी, इसलिए नागरिकों को चाहिए कि वे अपने कर्तव्यों को सर्वोपरि रखें और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।
संविधान निर्माताओं को दी श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री ने सामाजिक मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर संविधान दिवस की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर हमें अपने संविधान निर्माताओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करनी चाहिए, जिनकी दूरदर्शिता और समर्पण ने भारत को एक मजबूत लोकतांत्रिक संरचना प्रदान की। मोदी ने कहा, “हमारा संविधान मानवीय गरिमा, समानता और स्वतंत्रता को सर्वोच्च महत्व देता है। यह हमें अधिकारों से सशक्त बनाता है, साथ ही नागरिक कर्तव्यों की भी याद दिलाता है।”
संवैधानिक मूल्यों को जीवन में उतारने की अपील
पीएम मोदी ने कहा कि संविधान केवल एक दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह भारत के लोकतांत्रिक चरित्र और भारतीयता की आत्मा है। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे हर क्षेत्र में—चाहे समाज हो, शिक्षा हो, प्रशासन हो या व्यक्तिगत जीवन—संवैधानिक मूल्यों को प्राथमिकता दें।
उन्होंने कहा कि जब तक नागरिक कर्तव्यों का पालन नहीं करेंगे, तब तक अधिकारों की वास्तविक शक्ति का अनुभव करना संभव नहीं है। प्रधानमंत्री ने संविधान दिवस को संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने और राष्ट्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराने का उपयुक्त अवसर बताया।
पीएम मोदी के इस पत्र और संदेश का उद्देश्य युवाओं, खासकर नए मतदाताओं को लोकतांत्रिक प्रणाली में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना है, ताकि भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया और अधिक मजबूत और प्रभावी बन सके।
Correspondent – Shanwaz khan


