इथियोपिया के अफार क्षेत्र में स्थित Hayli Gubbi ज्वालामुखी के 23 नवंबर को हुए बड़े विस्फोट का असर अब भारत तक दिखाई देने लगा है। ज्वालामुखी से निकली राख का घना गुबार पूर्व दिशा में फैलता हुआ अरब सागर से होते हुए भारतीय वायु क्षेत्र तक पहुंच गया है। इसके चलते पश्चिमी और दक्षिणी भारत की ओर आने-जाने वाली कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को रद्द या पुनर्निर्देशित करना पड़ा है।
स्थिति को देखते हुए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने एयरलाइंस और हवाईअड्डों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है, जिसमें राख के बादलों से होने वाले खतरे, दृश्यता में कमी और इंजन डैमेज के जोखिम को लेकर सख्त निर्देश दिए गए हैं।
एयर इंडिया का बयान: सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
एयर इंडिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बताया कि एयरलाइन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। ऑपरेटिंग क्रू से रीयल-टाइम अपडेट लिए जा रहे हैं, ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। एयर इंडिया ने कहा कि वे प्रभावित यात्रियों के लिए वैकल्पिक यात्रा व्यवस्था करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं और सभी नेटवर्क स्टेशन पर ग्राउंड टीमें सक्रिय हैं।
इंडिगो की प्रतिक्रिया: स्थिति पर कड़ी निगरानी
इंडिगो ने भी यात्रियों को आश्वस्त किया कि राख के बादल पश्चिमी भारत की ओर बढ़ रहे हैं, लेकिन सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। एयरलाइन ने कहा कि उनकी टीमें अंतरराष्ट्रीय एविएशन एजेंसियों के संपर्क में हैं और किसी भी फैसला लेने से पहले हवा की दिशा, दृश्यता और वायु गुणवत्ता की स्थिति को ध्यान में रखा जा रहा है। यात्रियों को देरी या रद्दीकरण की जानकारी लगातार दी जा रही है।
कई उड़ानें रद्द, रूट बदलाव भी
राख के घने गुबार के कारण कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर असर पड़ा है––
- आकासा एयर ने जेद्दा, कुवैत और अबू धाबी के लिए 24 और 25 नवंबर की उड़ानें रद्द कर दी हैं।
- KLM डच एयरलाइंस ने अपनी एम्स्टर्डम-दिल्ली (KL 871) और दिल्ली-एम्स्टर्डम (KL 872) फ्लाइट्स रद्द की हैं।
- इंडिगो ने भी कई मार्गों में रूट परिवर्तन और संभावित देरी की चेतावनी जारी की है।
राख के बादल ऊंचाई पर उड़ान भरते विमानों के इंजनों के लिए सबसे अधिक खतरनाक माने जाते हैं, क्योंकि इससे टर्बाइन में गंभीर नुकसान हो सकता है। इसी कारण एयरलाइंस ने प्रतिबंधात्मक कदम उठाते हुए उड़ान संचालन को सीमित किया है।
DGCA का अलर्ट
DGCA ने हवाईअड्डों को एयरस्पेस मैपिंग, मौसम की स्थिति की निगरानी और रनवे visibility पर कड़ी नजर रखने को कहा है। साथ ही एयरलाइंस को निर्देश दिया गया है कि वे सुरक्षित ऊंचाई और वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करें।
ज्वालामुखीय राख के भारत तक पहुंचने की यह घटना दुर्लभ है और आने वाले 24-48 घंटों में स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है। यात्रियों से अनुरोध है कि वे अपनी यात्रा से पहले एयरलाइन अपडेट अवश्य चेक करें।
Correspondent – Shanwaz Khan


