उत्तर प्रदेश में बढ़ती सर्दी के साथ-साथ हवा में फैल रहा प्रदूषण लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ा रहा है। कई जिलों में वायु गुणवत्ता में सुधार के बजाय हालात और बिगड़ते दिखाई दे रहे हैं। खासकर दिल्ली–एनसीआर से सटे नोएडा और गाजियाबाद में हवा इतनी खराब हो चुकी है कि लोगों का सांस लेना मुश्किल होने लगा है। गुरुवार को भी कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400 से ऊपर दर्ज हुआ, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है।
ठंड बढ़ने और हवाओं की रफ्तार बेहद धीमी होने के चलते हवा में मौजूद प्रदूषक धरातल के पास ही जमा हो रहे हैं। मौसम विभाग ने पहले ही चेतावनी दी है कि सुबह और शाम को घना कोहरा और शीतलहर का प्रकोप बढ़ेगा। ऐसे में जहरीली धुंध से राहत मिलना फिलहाल मुश्किल है। ठंड और प्रदूषण का यह मिश्रण लोगों के स्वास्थ्य पर दोहरा असर डाल रहा है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए हालात और गंभीर बन सकते हैं।
गुरुवार, 20 नवंबर को भी स्थिति में कोई सुधार नहीं दिखा। ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क–5 में AQI 445 दर्ज हुआ, जो उत्तर प्रदेश के सबसे प्रदूषित इलाकों में शामिल रहा। नोएडा के अन्य क्षेत्रों में भी हवा की गुणवत्ता बेहद खराब रही। नोएडा सेक्टर–116 में सुबह 6 बजे AQI 443 रिकॉर्ड किया गया, जबकि सेक्टर–1 में यह 428 और सेक्टर–62 में 416 तक पहुंच गया। इन इलाकों में हवा में मौजूद कण बेहद खतरनाक स्तर पर हैं।
गाजियाबाद में भी प्रदूषण की स्थिति चिंताजनक रही। लोनी में AQI 432 मापा गया, जबकि इंदिरापुरम में 427, संजनगर में 420 और वसुंधरा में 429 तक पहुंच गया। इस प्रदूषण स्तर को ‘गैस चैंबर’ जैसी स्थिति बताया जा रहा है। हापुड़ में 365, बागपत में 382 और मेरठ में 332 AQI दर्ज होने के बाद ये जिले भी ‘बेहद खराब’ श्रेणी में शामिल रहे।
विशेषज्ञों की मानें तो जब AQI 400 के पार हो जाए तो यह गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है। ऐसे में लोगों को बाहर कम निकलने, मास्क पहनने और सुबह की सैर से बचने की सलाह दी जा रही है। स्थिति को देखते हुए प्रशासन भी मॉनिटरिंग बढ़ाने और प्रदूषण नियंत्रण उपायों को सख्ती से लागू करने की तैयारी में जुटा है।
उत्तर प्रदेश में ठंड और प्रदूषण का यह दोहरा संकट फिलहाल थमता नहीं दिख रहा है, और आने वाले दिनों में हवा की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद फिलहाल कम ही है।
Correspondent – Shanwaz Khan


