बिहार में राजनीतिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव आया है। नीतीश कुमार ने 19 नवंबर को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को एनडीए विधायकों का समर्थन पत्र सौंपा है, जिसके बाद उन्होंने नई सरकार बनाने का दावा पेश किया है।
यह कदम एनडीए गठबंधन के मजबूत प्रदर्शन के बाद उठाया गया है — हालिया विधानसभा चुनाव में एनडीए ने 200 से अधिक सीटें जीती थीं।
नीतीश कुमार की अगुवाई में, पिछली कैबिनेट की बैठक में एक प्रस्ताव पारित किया गया, जिसके तहत उन्होंने राज्यपाल को यह सुझाव दिया कि 17वीं विधानसभा को भंग कर दिया जाए। इस प्रस्ताव को राज्यपाल ने स्वीकार कर लिया है।
असल में, प्रस्तावित शपथ ग्रहण समारोह 20 नवंबर को पटना के गांधी मैदान में होगा, जहाँ नीतीश कुमार रिकॉर्ड 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे एनडीए के इस नए गठबंधन में जदयू (JD-U), भाजपा, और कुछ छोटे सहयोगी दल शामिल होंगे। विश्वास जताया जा रहा है कि नई सरकार में सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा उपमुख्यमंत्री बने रहेंगे। राजनीतिक रूप से यह कदम नीतीश कुमार की रणनीतिक चतुराई को दर्शाता है — उन्होंने अपना इस्तीफा और विधायकों का समर्थन समय से पहले पेश किया ताकि सत्ता में वापसी की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो सके। राज्यपाल को समर्थन पत्र सौंपने के बाद उनकी यह दावेदारी और मजबूती के साथ सामने आई है।
यह बदलाव न केवल उनके लिए, बल्कि बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत को भी दर्शाता है।
Correspondent – Shanwaz Khan


