2025 बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को ऐतिहासिक जीत मिली है। 243 सदस्यीय विधानसभा में एनडीए ने 202 सीटें हासिल कर स्पष्ट बहुमत सुनिश्चित कर लिया है।वहीं महागठबंधन को मात्र 35 सीटें पर सीमित होना पड़ा।
एनडीए की जीत के कारण
- एनडीए की जीत को “डबल इंजन सरकार” व सुशासन की छवि का जनादेश माना जा रहा है — नरेंद्र मोदी की राष्ट्रीय लोकप्रियता और नीतीश कुमार के लंबे शासन-काल ने मिलकर एक मजबूत लहर बनाई।
- चुनाव-पूर्व महिलाओं के बैंक खातों में ₹10,000 की राशि एवं महिला कल्याण से जुड़ी योजनाओं का लाभ देने जैसे उपायों ने महिलाओं तथा लाभार्थी वर्गों में समर्थन बढ़ाया।
- एनडीए घटक दलों के बीच सीट-साझेदारी, अभियान संचालन में बेहतर तालमेल तथा चहुंप्रतिकूल माहौल में विपक्षी गठबंधन की कमजोर स्थिति भी निर्णायक रहे।

2020 Bihar Election
महागठबंधन की हार की वजह
पिछड़े, दलित, महिला मतदाताओं में एनडीए की पैठ और महागठबंधन की ओर से उनकी अपेक्षाओं को पूरा न कर पाना बड़े कारण रहे।
महागठबंधन के घटक दलों में प्रचार अभियान, सीट-शेयरिंग और उम्मीदवार चयन के मामलों में तालमेल की कमी झलकती रही।
विपक्ष ने अपराध, “जंगल राज” और वोटर सूची संशोधन जैसे मुद्दों पर जोर दिया, लेकिन उनमें पर्याप्त जनसमर्थन नहीं जुटा पाया।
इसके पीछे की वजहें
✅ एनडीए के पक्ष में
- “डबल इंजन सरकार” और सुशासन की छवि: राज्य में पूर्वी-हिन्दी बेल्ट में विकास, कानून-व्यवस्था सुधार जैसे संदेश मिले।
- महिलाओं और लाभार्थी वर्गों पर फोकस: चुनाव से पहले महिलाओं के खातों में ₹10,000 जैसे हस्तांतरण तथा कल्याण योजनाओं का लाभ उठाया गया। mint+1
- गठबंधन समन्वय: एनडीए में उसकी मुख्य पार्टियों (बीजेपी + जदयू) और अन्य सहयोगियों के बीच बेहतर तालमेल दिखा।
- पुरानी राजनीतिक धारणाओं से मुक्ति: “जंगल राज”, अपराध-मुक्ति, वोटर लिस्ट शुद्धिकरण आदि-इस तरह के मुद्दे सामने थे।
महागठबंधन की कमजोरियाँ
- घटक दलों के बीच सीट-शेयरिंग, उम्मीदवार चयन, अभियान समन्वय में स्पष्ट कमी।
- सामाजिक आधार (जात-धर्म/तकनीकी मतदान समूह) में अपेक्षित बदलाव नहीं कर सके।
- विपक्षीय रणनीति (वोट चोरी, मतदाता सूची विवाद) को व्यापक जन-स्वीकृति नहीं मिली।


