Monday, March 2, 2026
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तेजस्वी यादव ने मारी मामूली बढ़त, नीतीश कुमार से कांटे की टक्कर – बिहार एग्जिट पोल 2025 के नतीजों ने बढ़ाई सियासी गर्मी

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के मतदान समाप्त होने के बाद आए ताज़ा एग्जिट पोल के आंकड़ों ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। वोट वाइब एग्जिट पोल 2025 के अनुसार इस बार मुकाबला बेहद करीबी नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राजद नेता तेजस्वी यादव के बीच सत्ता की जंग लगभग बराबरी पर अटकी हुई है। वहीं, प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी भी कुछ सीटों पर प्रभाव छोड़ती दिख रही है, जिससे मुकाबला और दिलचस्प बन गया है।

सर्वे के मुताबिक, मुख्यमंत्री पद के लिए तेजस्वी यादव को इस बार सबसे अधिक पसंद किया गया है। लगभग 35 प्रतिशत मतदाताओं ने तेजस्वी को अपनी पहली पसंद बताया है, जबकि 33 प्रतिशत मतदाता अब भी नीतीश कुमार के पक्ष में हैं। प्रशांत किशोर को 9 प्रतिशत लोगों का समर्थन मिला है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि जनता अभी भी तेजस्वी और नीतीश के बीच बंटी हुई है, और अंतिम नतीजा किसी भी दिशा में जा सकता है।

महिलाओं ने फिर जताया भरोसा एनडीए पर

सर्वे में सामने आया है कि महिला मतदाता अब भी एनडीए के साथ मजबूती से खड़ी हैं। जीविका योजना और महिला सशक्तिकरण कार्यक्रमों का लाभ ग्रामीण इलाकों में खासा दिख रहा है। महिलाओं ने बड़ी संख्या में एनडीए को वोट दिया है, जिससे गठबंधन को हल्की बढ़त मिलने का अनुमान है। यही फैक्टर 2020 के विधानसभा चुनाव में भी नीतीश कुमार की जीत का मुख्य कारण बना था।

युवाओं का झुकाव महागठबंधन की ओर

इस बार युवा मतदाताओं का रुझान महागठबंधन के पक्ष में नजर आ रहा है। तेजस्वी यादव ने पूरे प्रचार अभियान में रोजगार, सरकारी नौकरी, शिक्षा और पलायन जैसे मुद्दों को केंद्र में रखा। इसका असर शहरी और अर्धशहरी इलाकों में खासा दिखाई दे रहा है। पटना, गया, दरभंगा और मुजफ्फरपुर जैसे शहरों में युवाओं के बीच महागठबंधन की लोकप्रियता में इजाफा हुआ है।

एनडीए को हल्की बढ़त, लेकिन नतीजे अब भी अनिश्चित

कुल वोट प्रतिशत के हिसाब से एनडीए मामूली अंतर से आगे बताया जा रहा है। एग्जिट पोल के अनुसार, एनडीए को लगभग 45 प्रतिशत वोट, जबकि महागठबंधन को 42 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है। जन सुराज पार्टी करीब 5 प्रतिशत वोट शेयर हासिल करती दिख रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतने छोटे अंतर में कोई भी हल्का बदलाव सत्ता का समीकरण पूरी तरह बदल सकता है।

जन सुराज बनी तीसरी राजनीतिक शक्ति

प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी पहली बार बिहार की राजनीति में ठोस उपस्थिति दर्ज करा रही है। भले ही पार्टी सरकार बनाने की दौड़ में नहीं है, लेकिन कई सीटों पर उसने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। विश्लेषकों का कहना है कि अगर जन सुराज का वोट शेयर किसी एक गठबंधन से अधिक कटा, तो परिणामों पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।

निष्कर्ष

एग्जिट पोल के आंकड़े बताते हैं कि बिहार की जनता इस बार भी परिवर्तन और स्थिरता के बीच बंटी हुई है। महिलाओं का भरोसा नीतीश कुमार पर कायम है, जबकि युवा वर्ग बदलाव के प्रतीक तेजस्वी यादव की ओर आकर्षित हो रहा है। अब सारा ध्यान मतगणना के दिन पर टिका है, जो यह तय करेगा कि बिहार की सत्ता की कुर्सी पर कौन बैठेगा — नीतीश कुमार का तजुर्बा या तेजस्वी यादव का जोश।

Correspondent – Shanwaz Khan

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