अगस्त 2024 से भारत में निर्वासित जीवन बिता रहीं बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के खिलाफ एक बड़ा सियासी दांव खेला है। दिल्ली से उन्होंने घोषणा की है कि अगर उनकी पार्टी, अवामी लीग, को आगामी चुनावों में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं दी गई, तो लाखों समर्थक मतदान का बहिष्कार करेंगे। 78 वर्षीय हसीना ने स्पष्ट किया है कि वह चुनाव के बाद बनने वाली किसी भी सरकार के तहत बांग्लादेश वापस नहीं लौटेंगी और फिलहाल भारत में ही रहने की योजना बना रही हैं।
रॉयटर्स को दिए अपने पहले विस्तृत मीडिया संबोधन में शेख हसीना ने अवामी लीग पर लगे प्रतिबंध को “अन्यायपूर्ण और आत्मघाती” करार दिया। उन्होंने कहा, “अगर आप एक कारगर राजनीतिक व्यवस्था चाहते हैं, तो आप लाखों लोगों को उनके मताधिकार से वंचित नहीं कर सकते।” उन्होंने चेतावनी दी कि अवामी लीग के बिना होने वाले चुनावों से बनी सरकार के पास कोई चुनावी वैधता नहीं होगी।
बता दें कि यूनुस सरकार ने देश की सुरक्षा और युद्ध अपराधों की जांच का हवाला देते हुए अवामी लीग की सभी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया था। बांग्लादेश में 12.6 करोड़ से अधिक मतदाता हैं, और पारंपरिक रूप से राजनीति पर अवामी लीग और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) का दबदबा रहा है।
अपने भविष्य के बारे में बात करते हुए, शेख हसीना ने कहा कि वह दिल्ली में स्वतंत्र रूप से रह रही हैं, लेकिन अपने परिवार के साथ हुई पिछली घटनाओं को देखते हुए सतर्क हैं। उन्होंने घर वापसी की इच्छा जताते हुए कहा, “मैं निश्चित रूप से घर जाना चाहूंगी, बशर्ते वहां की सरकार वैध हो और संविधान का पालन करे।” उनके इस बयान ने फरवरी में होने वाले बांग्लादेशी चुनावों को लेकर अनिश्चितता और बढ़ा दी है।]


