बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की रणभेरी बजने से पहले ही सियासी गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म हो गया है। राज्य की अगली सरकार किसकी होगी, इस सवाल को लेकर तरह-तरह के दावे और विश्लेषण सामने आ रहे हैं। इस चुनावी गहमागहमी के बीच, राजस्थान के मशहूर फलोदी सट्टा बाजार ने एक चौंकाने वाला अनुमान जारी किया है, जो हाल ही में आए एक चुनावी सर्वे के नतीजों से बिल्कुल मेल नहीं खाता। इन दोनों अलग-अलग अनुमानों ने बिहार के चुनावी मुकाबले को और भी रहस्यमयी और रोमांचक बना दिया है।
फलोदी सट्टा बाजार का स्पष्ट जनादेश
चुनावों पर अपने सटीक अनुमानों के लिए जाने जाने वाले फलोदी सट्टा बाजार ने बिहार में एक बार फिर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सरकार बनने की प्रबल संभावना जताई है। सटोरियों के मुताबिक, इस चुनाव में एनडीए गठबंधन को 135 से 138 सीटें हासिल हो सकती हैं, जो कि 243 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए जरूरी 122 सीटों के आंकड़े से काफी ज्यादा है। इसके विपरीत, सट्टा बाजार ने तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन के लिए निराशाजनक तस्वीर पेश की है, और उसे केवल 93 से 96 सीटों पर ही सीमित कर दिया है। यह स्पष्ट रूप से एनडीए के पक्ष में एकतरफा लहर का संकेत देता है।
वोट वाइब सर्वे का करीबी मुकाबला
हालांकि, जब हम वोट वाइब द्वारा किए गए सर्वे पर नजर डालते हैं, तो तस्वीर बिल्कुल अलग नजर आती है। इस सर्वे में एनडीए और महागठबंधन के बीच कांटे की टक्कर दिखाई दे रही है। सर्वे में शामिल 34.7% लोगों ने महागठबंधन की जीत का अनुमान लगाया, जबकि 34.4% लोग एनडीए की वापसी के पक्ष में दिखे। यह मामूली अंतर दिखाता है कि जमीनी स्तर पर लड़ाई कितनी करीबी है। इस सर्वे ने एक और महत्वपूर्ण तथ्य को उजागर किया है – प्रशांत किशोर की पार्टी ‘जन सुराज’ का बढ़ता प्रभाव, जिसे 12.3% लोगों ने अपनी पसंद बताया।
‘प्रशांत किशोर’ फैक्टर
वोट वाइब के संस्थापक अमिताभ तिवारी के अनुसार, बिहार का चुनाव अब द्विपक्षीय नहीं रहा, बल्कि प्रशांत किशोर की ‘जन सुराज’ की वजह से यह एक त्रिकोणीय मुकाबले में तब्दील हो गया है। तिवारी का मानना है कि किशोर की पार्टी किसके वोट काटेगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है, जिससे दोनों प्रमुख गठबंधनों के रणनीतिकार चिंतित हैं। इस अनिश्चितता ने मतदाताओं के बीच भी एक असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है। तिवारी ने यह भी जोड़ा कि तेजस्वी यादव का ‘हर घर सरकारी नौकरी’ का वादा महागठबंधन के पक्ष में एक सकारात्मक माहौल बना सकता है, लेकिन इसका अंतिम प्रभाव जन सुराज की भूमिका पर भी निर्भर करेगा।
निष्कर्ष
इस प्रकार, बिहार चुनाव 2025 को लेकर दो अलग-अलग कहानियां सामने आ रही हैं। एक तरफ सट्टा बाजार एनडीए को स्पष्ट विजेता बता रहा है, तो दूसरी तरफ सर्वे एक बेहद करीबी और त्रिकोणीय लड़ाई की ओर इशारा कर रहे हैं। असली विजेता कौन होगा, इसका फैसला तो मतदाता ही करेंगे, लेकिन यह तय है कि प्रशांत किशोर का ‘एक्स फैक्टर’ इस चुनाव के नतीजों को प्रभावित करने में एक निर्णायक भूमिका निभाएगा।]


