पटना:
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण के लिए नामांकन प्रक्रिया शुक्रवार को पूरी हो गई। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, पहले चरण की 121 सीटों के लिए 1,250 से अधिक उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किए हैं। अंतिम आंकड़ा अभी बढ़ सकता है क्योंकि कुछ जिलों की रिपोर्ट फिलहाल अधूरी है।
इस बार सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) पूरी मजबूती और एकजुटता के साथ चुनावी मैदान में उतर रहा है। भाजपा और जद (यू) के बीच सीटों को लेकर औपचारिक समझौता हो चुका है — दोनों दल 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। शेष सीटें लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा को दी गई हैं। एनडीए में अब तक किसी तरह का मतभेद सामने नहीं आया है और गठबंधन दल संयुक्त रूप से प्रचार अभियान चला रहे हैं। भाजपा और जद (यू) दोनों दल संगठनात्मक मजबूती और विकास के एजेंडे पर जनता के बीच जा रहे हैं।
विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन में अब भी भ्रम और असमंजस की स्थिति बनी हुई है। राजद, कांग्रेस, वाम दलों और मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के इस गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर मतभेद जारी हैं। स्थिति यह है कि कई सीटों पर गठबंधन के घटक दलों के उम्मीदवार एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में हैं। सूत्रों के अनुसार, लगभग आधा दर्जन सीटों पर ‘इंडिया’ गठबंधन के एक से अधिक प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया है। यदि इन नामांकनों की वापसी 20 अक्टूबर तक नहीं हुई, तो कई क्षेत्रों में ‘फ्रेंडली फाइट’ देखने को मिल सकती है।
जाले विधानसभा सीट पर गठबंधन के भीतर असमंजस साफ नजर आया, जहां कांग्रेस ने राजद नेता ऋषि मिश्रा को अपने टिकट पर लड़ने की मंजूरी दी। वहीं, लालगंज में स्थिति उलट है — यहां राजद ने कांग्रेस के पक्ष में कोई समझौता नहीं किया, जिससे कांग्रेस के आदित्य कुमार राजा और राजद की ओर से शिवानी शुक्ला दोनों उम्मीदवार बने हुए हैं। वैशाली और कहलगांव में भी ऐसी ही स्थिति बनने के आसार हैं।
कांग्रेस के बछवाड़ा, राजापाकर और रोसेरा सीटों पर वाम दलों से सीधे मुकाबले की संभावना है। वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी ने इस बार चुनाव न लड़ने का निर्णय लिया है, हालाँकि 2020 में उनकी पार्टी ने चार सीटों पर जीत दर्ज की थी।
पहले चरण के नामांकन के साथ ही बिहार का राजनीतिक माहौल बेहद गर्म हो गया है। एनडीए जहां अपने तालमेल और नेतृत्व पर भरोसा जता रहा है, वहीं ‘इंडिया’ गठबंधन अभी भी सीट बंटवारे को लेकर स्पष्टता लाने के लिए संघर्षरत है।


