गुजरात में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने शुक्रवार, 17 अक्टूबर, को अपनी नई कैबिनेट का गठन किया। गांधीनगर स्थित महात्मा मंदिर में आयोजित समारोह में राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस मौके पर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा भी मौजूद रहे। यह कैबिनेट राज्य की राजनीतिक और सामाजिक संतुलन को दर्शाती है, जिसमें अनुभव और युवा नेतृत्व का समावेश किया गया है।
नई कैबिनेट में कुल 25 मंत्री शामिल हैं, जिनमें से 19 नए चेहरे पहली बार मंत्री बने हैं, जबकि 6 पूर्व मंत्रियों को दोबारा मौका दिया गया है। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि हर्ष सांघवी को गुजरात का नया उपमुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) बनाया गया है। युवा और ऊर्जावान नेता माने जाने वाले सांघवी सूरत से विधायक हैं और राज्य के भीतर कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक सुधारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं।
नए मंत्रिमंडल में शामिल प्रमुख चेहरों में रीवाबा जडेजा भी हैं, जो जामनगर उत्तर से विधायक और क्रिकेटर रवींद्र जडेजा की पत्नी हैं। 35 वर्ष की उम्र में मंत्री बनकर उन्होंने युवा नेतृत्व का प्रतिनिधित्व किया है। इसके अतिरिक्त, कांति अमृतिया (मोरबी), त्रिकम छंगा, पी.सी. बरंडा (सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी), और अर्जुन मोढवाडिया जैसे नेताओं को भी मंत्रिमंडल में जगह मिली है। साथ ही, जितेंद्र वाघानी, दर्शना वाघेला, कुंवरजीभाई बावलिया, रमण सोलंकी, मनीषा वकील, ईश्वर सिंह पटेल, और नरेश पटेल को भी जिम्मेदारी दी गई है।
भूपेंद्र पटेल की नई टीम में जातिगत और क्षेत्रीय संतुलन को प्रमुखता दी गई है। इसमें मुख्यमंत्री समेत 8 पाटीदार, 8 ओबीसी, 4 आदिवासी, और 3 अनुसूचित जाति के विधायक शामिल हैं। इसके अलावा, जैन समुदाय से हर्ष सांघवी और क्षत्रिय समुदाय से रीवाबा जडेजा को प्रतिनिधित्व मिला है। इस संतुलन के जरिए पार्टी ने विभिन्न सामाजिक वर्गों को साधने की रणनीति अपनाई है।
हालांकि, इस विस्तार में कई वरिष्ठ नेताओं को जगह नहीं मिली है, जिनमें राघवजी पटेल, बलवंतसिंह राजपूत, कुबेरभाई डिंडोर, भानुबेन बाबरिया, मुकेश पटेल, और जगदीश विश्वकर्मा प्रमुख हैं। इन्हें बाहर रखकर पार्टी ने संकेत दिया है कि वह 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर नई और युवा टीम के साथ आगे बढ़ना चाहती है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस कैबिनेट विस्तार से बीजेपी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह आगामी चुनावों से पहले संगठन में नई ऊर्जा और सामाजिक समीकरणों के संतुलन का संदेश देना चाहती है। भूपेंद्र पटेल की यह टीम अनुभव, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और युवा जोश का मिश्रण है, जो गुजरात की राजनीति में नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।


