पटना से मिली जानकारी के अनुसार, वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी और महागठबंधन नेतृत्व के बीच सीटों पर समझौता हो गया है। इस समझौते के तहत वीआईपी को 15 विधानसभा सीटें, 2 विधान परिषद (एमएलसी) सीटें, और 1 राज्यसभा सीट दी गई हैं। इस निर्णय के बाद पार्टी ने ऐलान किया है कि वह महागठबंधन का हिस्सा बनी रहेगी और चुनाव मजबूती के साथ लड़ेगी।
वीआईपी ने दो प्रमुख उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की है। पार्टी प्रमुख मुकेश सहनी खुद दरभंगा जिले की गौड़ा बौराम सीट से चुनाव लड़ेंगे, जबकि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बाल गोविंद बिंद को भभुआ सीट से प्रत्याशी बनाया गया है। इसके अलावा पार्टी कई अन्य सीटों पर भी उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है, जिनमें दरभंगा शहरी, कुशेश्वरस्थान और गोरा बौराम शामिल हैं। आज यानी शुक्रवार, 17 अक्टूबर, नामांकन की आखिरी तारीख है, और दोनों उम्मीदवार इसी दिन नामांकन दाखिल करेंगे।
बीते कुछ दिनों से सीट बंटवारे पर दोनों दलों के बीच मतभेद बढ़ गए थे। मुकेश सहनी अधिक सीटों की मांग पर अड़े हुए थे, जिससे महागठबंधन में अस्थायी गतिरोध उत्पन्न हो गया था। मामला तब सुलझा जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने खुद सहनी से फोन पर बातचीत की और समझाने की कोशिश की। इसके बाद देर रात दोनों पक्षों के बीच सहमति बन गई और गुरुवार शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस में औपचारिक रूप से समझौते की घोषणा की गई।
समझौते के बाद सहनी ने कहा कि यह चुनाव वीआईपी के लिए ‘आवाज की लड़ाई’ है। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी इस बार पिछड़े वर्गों, वंचित समाजों, और खासकर मछुआरा समुदाय की आवाज को विधानसभा तक पहुंचाएगी। दरभंगा के मछली मंडी में पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उमेश साहनी को चुनाव का सिंबल सौंपते हुए संगठन की एकजुटता पर जोर दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह समझौता महागठबंधन के लिए राहत लेकर आया है। वीआईपी की वापसी से दल के सामाजिक समीकरण और मजबूत होंगे। साथ ही, यह सहमति बिहार की राजनीति में मुकेश सहनी की प्रासंगिकता को फिर से रेखांकित करती है और संकेत देती है कि महागठबंधन आगामी चुनावों में पहले से ज्यादा संगठित होकर मैदान में उतरेगा।


