नई दिनई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने दीवाली से पहले दिल्ली-एनसीआर के लोगों को राहत देते हुए ग्रीन पटाखों की बिक्री और जलाने की अनुमति दे दी है। हालांकि, यह अनुमति कुछ सख्त शर्तों के साथ दी गई है, ताकि प्रदूषण और पर्यावरण संतुलन दोनों को ध्यान में रखा जा सके।
मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और एमिकस क्यूरी के सुझावों पर विचार करते हुए यह फैसला दिया है। उन्होंने कहा कि यह कदम त्योहार की भावना और पटाखा उद्योग से जुड़े लाखों लोगों के हितों को देखते हुए उठाया गया है।
🔹 कोर्ट ने क्या कहा
सीजेआई गवई ने कहा —
“हमें संतुलित दृष्टिकोण अपनाना होगा। केवल पटाखों को प्रदूषण के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। हरियाणा के 14 जिले NCR में आते हैं, जिससे राज्य का लगभग 70% हिस्सा इस बैन से प्रभावित रहा है।”
कोर्ट ने यह भी स्वीकार किया कि पटाखों पर पूरी तरह रोक से दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण स्तर में कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ, इसलिए अब सीमित रूप से ग्रीन पटाखों की अनुमति दी जा रही है।
🔹 कौन बेच सकेगा पटाखे
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सिर्फ वही निर्माता और विक्रेता ग्रीन पटाखे बेच सकेंगे, जिन्हें
- NEERI (National Environmental Engineering Research Institute)
और - PESO (Petroleum and Explosives Safety Organisation)
से लाइसेंस प्राप्त है।
कोर्ट ने QR कोड वाले असली ग्रीन पटाखों की बिक्री सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। गलत या गैर-लाइसेंसधारी पटाखे बेचने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।
🔹 पटाखे जलाने का समय
कोर्ट ने तय किया है कि 18 से 21 अक्टूबर के बीच ही सीमित स्थानों पर ग्रीन पटाखे बेचे जा सकेंगे।
पटाखे जलाने के लिए समय तय किया गया है —
- दीवाली से एक दिन पहले और दीवाली के दिन
🕕 सुबह 6 बजे से 7 बजे तक
🕗 शाम 8 बजे से 10 बजे तक
पुलिस और प्रशासन को निगरानी बढ़ाने और सैंपल जांच करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि केवल ग्रीन पटाखों का ही इस्तेमाल हो।
🔹 क्यों लिया गया यह फैसला
सुनवाई के दौरान पटाखा उत्पादकों ने दलील दी कि सरकार पराली जलाने और वाहन प्रदूषण पर पर्याप्त ध्यान नहीं देती, जबकि केवल पटाखों को निशाना बनाया जा रहा है। कोर्ट ने यह माना कि 2018 में पटाखों पर लगे बैन के बाद AQI (वायु गुणवत्ता सूचकांक) में कोई बड़ा सुधार नहीं देखा गया।
कोर्ट ने कहा कि उत्सव की भावना और पर्यावरण सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना ही इस फैसले का उद्देश्य है।


