Patna | Bihar Election 2025:
बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आरजेडी (RJD) कैंप में मंगलवार रात एक बड़ा सियासी ड्रामा हुआ। पार्टी ने कई उम्मीदवारों को चुनावी सिंबल (चिन्ह) बांट दिए, लेकिन कुछ घंटों बाद ही उनसे सिंबल वापस ले लिए गए। अब इसके पीछे की इनसाइड स्टोरी सामने आ रही है।
राजद में देर रात मचा हड़कंप
जानकारी के मुताबिक, मंगलवार शाम लालू प्रसाद यादव ने पटना स्थित राबड़ी देवी आवास (10 सर्कुलर रोड) में कई उम्मीदवारों को पार्टी का सिंबल दिया। इनमें मनेर से भाई वीरेंद्र, मटिहानी से बोगो सिंह, परबत्ता से डॉ. संजीव, हथुआ से राजेश कुशवाहा, और संदेश से दीपू यादव (पूर्व विधायक अरुण यादव के बेटे) शामिल थे।
रात होते-होते इन सभी से सिंबल वापस मंगा लिया गया।
तेजस्वी यादव दिल्ली में, लालू पटना में
दरअसल, यह पूरा घटनाक्रम तब हुआ जब तेजस्वी यादव दिल्ली में कांग्रेस नेताओं के साथ सीट शेयरिंग पर बातचीत कर रहे थे। इस दौरान लालू यादव पटना लौट चुके थे और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कई सीटों पर पहले से तैयार सिंबल उम्मीदवारों को सौंपने शुरू कर दिए।
लेकिन जैसे ही तेजस्वी को इसकी जानकारी मिली, उन्होंने तत्काल इस पर रोक लगा दी।
कांग्रेस एंगल और सीट विवाद
सूत्रों के मुताबिक, आरजेडी की कुछ सीटें अब भी कांग्रेस और अन्य गठबंधन दलों के साथ फाइनल नहीं हुई हैं। बावजूद इसके, उन सीटों पर उम्मीदवारों को सिंबल दे दिया गया था।
यह कदम तब विवाद में आ गया जब एक ऐसी सीट पर सिंबल बांटने की तैयारी हुई, जहां से महागठबंधन के सहयोगी दल के मुखिया खुद चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं।
जैसे ही यह बात उस दल के नेता को पता चली, उन्होंने सीधे राजद के वरिष्ठ नेताओं को फोन कर आपत्ति दर्ज कराई। परिणामस्वरूप सभी विवादित सीटों से सिंबल वापसी के आदेश दे दिए गए।
मधेपुरा में फिर उलझन — चंद्रशेखर बनाम शांतनु यादव
मधेपुरा सीट पर भी असमंजस जारी है। मौजूदा विधायक प्रो. चंद्रशेखर को राबड़ी आवास बुलाया गया था, लेकिन उन्हें सिंबल नहीं दिया गया। कहा जा रहा है कि पार्टी इस सीट से शरद यादव के बेटे शांतनु यादव को टिकट देने पर विचार कर रही है।
चंद्रशेखर ने बाहर निकलते हुए कहा — “मैं सिर्फ शिष्टाचार मुलाकात के लिए आया था, टिकट पर फैसला आलाकमान करेगा।”
तेजस्वी की वापसी के बाद सब कुछ बदला
तेजस्वी यादव के पटना लौटते ही सभी विवादित उम्मीदवारों से सिंबल वापस ले लिए गए। पार्टी के अंदर इसे “डैमेज कंट्रोल मूव” माना जा रहा है।
अब राजद में यह चर्चा तेज है कि किसका टिकट बचेगा और किसका कटेगा, और क्या इस फैसले से गठबंधन में नए तनाव पैदा होंगे।


