देश में बढ़ती महंगाई और अंतरराष्ट्रीय हालात के बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद रामगोपाल यादव के एक बयान ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। उन्होंने दावा किया है कि आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल के दामों में 50 से 60 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
रामगोपाल यादव ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार जानबूझकर कीमतों में बढ़ोतरी को टाल रही है। उनके अनुसार, सरकार चार राज्यों में होने वाले चुनावों के खत्म होने का इंतजार कर रही है, जिसके बाद ईंधन की कीमतों में बड़ा इजाफा किया जा सकता है। उनके इस बयान ने आम लोगों के बीच चिंता बढ़ा दी है।
सपा नेता ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई दे रहा है। इस संघर्ष के कारण कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो रही है, जिससे ईंधन की कमी और कीमतों में उछाल की स्थिति बन रही है। उन्होंने दावा किया कि इस स्थिति का सीधा असर भारत की तेल कंपनियों पर भी पड़ रहा है, जिन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है।
दिल्ली में बिजली दरों में संभावित बढ़ोतरी को लेकर भी रामगोपाल यादव ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सरकार आम जनता की परेशानियों को नजरअंदाज कर रही है और उसका ध्यान केवल बड़े उद्योगपतियों के हितों की रक्षा करने पर है। उनके मुताबिक, आम आदमी महंगाई की मार झेल रहा है, लेकिन सरकार इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठा रही है।
इसी मुद्दे पर सपा सांसद डिंपल यादव ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विपक्ष पहले से ही एलपीजी की कमी और उससे जुड़ी समस्याओं को उठाता रहा है, लेकिन सरकार ने इन चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने यह भी कहा कि ऊर्जा संकट का असर अब फूड सप्लाई चेन पर भी पड़ने लगा है, जिससे आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
वहीं, केंद्र सरकार ने हालात की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तर पर समीक्षा की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में बदलते हालात के मद्देनज़र पेट्रोलियम, गैस, बिजली और उर्वरक क्षेत्रों की स्थिति पर विस्तृत बैठक की। यह बैठक करीब साढ़े तीन घंटे तक चली, जिसमें संभावित चुनौतियों और उनके समाधान पर चर्चा की गई।
कुल मिलाकर, अंतरराष्ट्रीय तनाव और घरेलू राजनीति के बीच पेट्रोल-डीजल की कीमतें एक बड़ा मुद्दा बनती जा रही हैं। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार इस चुनौती से कैसे निपटती है और आम जनता को राहत देने के लिए क्या कदम उठाती है।
Correspondent – Shanwaz Khan


