पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे भाजपा के साथ मिलीभगत का केंद्र बताया है। उन्होंने राज्य में 50 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों के अचानक तबादलों को राजनीतिक हस्तक्षेप करार दिया, जो लोकतंत्र के लिए खतरा है।
अधिकारियों के बड़े पैमाने पर तबादले
चुनाव घोषणा से ठीक पहले मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी, एडीजी, आईजी, डीआईजी, जिलाधिकारी और एसपी समेत दर्जनों अधिकारियों को मनमाने ढंग से हटा दिया गया। ममता ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर कहा कि यह प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि उच्च स्तर की साजिश है, जिसमें आईबी, एसटीएफ और सीआईडी के प्रमुखों को चुनिंदा तरीके से राज्य से बाहर भेजा जा रहा है।
इससे राज्य का प्रशासनिक ढांचा कमजोर हो रहा है, खासकर सिलीगुड़ी और बिधाननगर जैसे महत्वपूर्ण शहरों में पुलिस कमिश्नरों की कमी से अराजकता फैल सकती है। हालांकि बाद में कुछ नियुक्तियां सुधारी गईं, लेकिन यह आयोग की अक्षमता को दर्शाता है।
मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोप
ममता ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया पर सवाल उठाए, जिसमें 200 से अधिक लोगों की जान गई और लाखों मतदाताओं के नाम सूची से गायब हो गए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद अनुपूरक मतदाता सूची जारी नहीं हुई, जो आम नागरिकों में भय पैदा कर रही है।
आयोग के फैसलों में विरोधाभास है—एक ओर हटाए गए अधिकारी चुनाव ड्यूटी से दूर, दूसरी ओर उन्हें पर्यवेक्षक बनाकर भेज दिया जाता है। ममता ने इसे ‘व्हाट्सएप आयोग’ कहा, जो भाजपा के इशारे पर काम कर रहा है।
भाजपा पर निशाना, बंगाल की एकजुटता
ममता ने भाजपा से सवाल किया कि वे बंगाल को बार-बार क्यों निशाना बना रहे हैं? स्वतंत्रता के 78 वर्ष बाद भी नागरिकों को पहचान साबित करने के लिए लाइनों में खड़ा करना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने इसे ‘अघोषित आपातकाल’ और ‘राष्ट्रपति शासन जैसे हालात’ बताया।
भाजपा जनता का भरोसा जीतने में नाकाम रही, इसलिए संस्थाओं का दुरुपयोग कर सत्ता हथियाना चाहती है। ममता ने अधिकारियों और उनके परिवारों के प्रति एकजुटता दिखाई तथा कहा, ‘बंगाल डरने वाला नहीं, हर साजिश नाकाम करेगा।’
राजनीतिकरण और संवैधानिक हमला
निष्पक्ष संस्थाओं का राजनीतिकरण संविधान पर सीधा प्रहार है। ईद जैसे संवेदनशील समय में तबादले दंगे भड़काने की योजना का हिस्सा लगते हैं। ममता ने चेतावनी दी कि कोई अप्रिय घटना हो तो आयोग और भाजपा जिम्मेदार होंगे।
यह सारी कार्रवाई 2026 विधानसभा चुनावों को प्रभावित करने के लिए है, लेकिन तृणमूल कांग्रेस पूरी ताकत से लड़ेगी। बंगाल की जनता साजिशों के आगे नहीं झुकेगी।
Bengal – Piyush Dhar Diwedi


