असम विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं और इसी बीच राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने सीट शेयरिंग का फॉर्मूला लगभग तय कर लिया है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में गठबंधन चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है। सूत्रों के अनुसार, राज्य की कुल 126 विधानसभा सीटों में से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सबसे अधिक 89 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है, जबकि उसके सहयोगी दलों को बाकी 37 सीटें दी जाएंगी।
इस सीट बंटवारे के तहत असम गण परिषद (एजीपी) को 26 सीटें और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) को 11 सीटें मिलने की संभावना है। मुख्यमंत्री सरमा ने 17 मार्च 2026 को इस संबंध में संकेत देते हुए कहा कि सीटों के बंटवारे पर बातचीत अंतिम चरण में है और जल्द ही गठबंधन अपनी पूरी रणनीति घोषित करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि एनडीए पूरी एकजुटता के साथ चुनाव मैदान में उतरेगा, ताकि बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित किया जा सके।
गौरतलब है कि पिछली बार यानी 2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 92 सीटों पर चुनाव लड़ा था। उस समय एजीपी को 26 सीटें और यूनाइटेड पीपल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) को 8 सीटें दी गई थीं। 2021 का चुनाव एनडीए के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ था, क्योंकि यह पहली बार था जब किसी गैर-कांग्रेस गठबंधन ने असम में लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी की थी। उस चुनाव में एनडीए ने कुल 126 सीटों में से 75 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। बीजेपी ने अकेले 60 सीटें हासिल की थीं, जबकि एजीपी को 9 सीटें मिली थीं।
इस बार के चुनाव में भी सीटों का बंटवारा बेहद अहम माना जा रहा है, खासकर बोडोलैंड क्षेत्र में, जहां क्षेत्रीय दलों का मजबूत प्रभाव है। बीपीएफ को दी गई सीटें इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर गठबंधन को मजबूती मिल सके। वहीं एजीपी को भी पर्याप्त सीटें देकर एनडीए अपने पुराने सहयोगी को साथ बनाए रखना चाहता है।
सूत्रों के मुताबिक, उम्मीदवारों के चयन पर भी तेजी से काम चल रहा है और कई नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है। कुछ सीटों पर बदलाव की भी संभावना है, ताकि एंटी-इंकम्बेंसी फैक्टर को कम किया जा सके। दिलचस्प बात यह है कि कुछ नए नाम भी सामने आ रहे हैं, जो इस बार चुनावी मैदान में उतर सकते हैं।
असम में 9 अप्रैल 2026 को सभी 126 सीटों के लिए मतदान प्रस्तावित है। चुनाव आयोग द्वारा तारीखों की घोषणा के बाद सभी राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। एनडीए जहां एक बार फिर सत्ता में वापसी का दावा कर रहा है, वहीं विपक्षी दल भी मजबूत चुनौती पेश करने की कोशिश में जुटे हैं।
कुल मिलाकर, सीट शेयरिंग का यह फॉर्मूला एनडीए के लिए चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा साबित हो सकता है। अब देखना यह होगा कि यह गठबंधन चुनाव में कितनी सफलता हासिल कर पाता है और क्या वह लगातार तीसरी बार असम की सत्ता पर काबिज हो पाएगा।
Correspondent – Shanwaz Khan


