उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। इस बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले में कथित वीआईपी संलिप्तता के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए साफ कहा कि सरकार की ओर से किसी भी व्यक्ति को बचाने की कोई कोशिश नहीं की गई है और पूरा मामला कानून के तहत ही आगे बढ़ा है।
एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इस मामले में पहले दिन से गंभीर और सक्रिय रही है। उन्होंने बताया कि जांच के लिए महिला आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया था, जिसने व्यापक जांच की। सीएम के मुताबिक, इस केस में कई गिरफ्तारियां हुईं और लगभग 1000 पन्नों की विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार की गई, जिसमें सभी पक्षों से पूछताछ और तथ्यों की पड़ताल की गई।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि आरोपियों को अदालत ने दोषी ठहराया है और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि भारत में उम्रकैद कोई छोटी सजा नहीं होती और यह दर्शाता है कि न्यायिक प्रक्रिया के तहत कड़ी कार्रवाई हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का स्पष्ट रुख शुरू से ही यही रहा है कि दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।
मामले से जुड़े वायरल ऑडियो क्लिप और वीआईपी एंगल पर चल रही चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोग इस संवेदनशील मामले को लेकर भ्रम और अफवाह फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिनके पास इस मामले से जुड़े ठोस सबूत हैं, वे उन्हें एसआईटी को सौंप सकते हैं, ताकि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ सके। उनके अनुसार कानूनी प्रक्रिया अपने निर्धारित तरीके से ही चलती है और उसमें किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं किया जाता।
महापंचायत और विपक्ष की ओर से उठ रही मांगों पर भी मुख्यमंत्री ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक दलों के पास ठोस मुद्दों की कमी है, इसलिए वे अंकिता भंडारी के नाम पर लोगों को भड़काने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य की जनता सरकार की नीति और नीयत पर भरोसा करती है और सरकार पारदर्शिता के साथ काम कर रही है।
इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने राज्य में अवैध खनन के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने दावा किया कि सरकार के सख्त कदमों के कारण राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और पहले जहां खनन से करीब 400 करोड़ रुपये का राजस्व आता था, अब यह बढ़कर लगभग 1200 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने आरोप लगाने वालों के प्रति भी संयमित रुख अपनाते हुए कहा कि आलोचनाओं को वह सुझाव और सुधार के अवसर के रूप में लेते हैं और सरकार जनहित में काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।
Correspondent – Shanwaz Khan


