उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन सदन में महंगाई के मुद्दे पर चर्चा के दौरान राजनीतिक माहौल उस समय रोचक लेकिन तीखा हो गया, जब विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच शायरी और तंज के जरिए तीखी नोकझोंक देखने को मिली। चर्चा की शुरुआत महंगाई के मुद्दे से हुई, लेकिन जल्द ही यह बहस ‘बोतल’ शब्द को लेकर राजनीतिक कटाक्ष और हंसी-ठिठोली में बदल गई, जिससे पूरे सदन में शोर-शराबा और ठहाकों का माहौल बन गया।
सत्र के दौरान समाजवादी पार्टी के विधायक आशु मलिक ने महंगाई और कालाबाजारी का मुद्दा उठाते हुए शायरी के माध्यम से सरकार पर निशाना साधना शुरू किया। उनकी कविता पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने उन्हें बीच में टोकते हुए कहा कि वे सीधे प्रश्न पूछें। इस पर मलिक ने कहा कि उन्हें बोलने के लिए अभी बहुत कम समय मिला है, लेकिन अध्यक्ष ने सख्ती से कहा कि समय का मतलब यह नहीं कि विषय से हटकर कुछ भी कहा जाए। इसके बावजूद सपा विधायक ने अपनी बात शायरी के जरिए जारी रखी और महंगाई को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।
इसके बाद सपा विधायक आर.के. वर्मा ने भी महंगाई पर अपनी बात रखते हुए एक शेर पढ़ा, जिसमें उन्होंने तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर आम जनता की परेशानी का जिक्र किया। उनकी शायरी में ‘तेल की बोतल’ का उल्लेख होते ही सत्ता पक्ष की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई। गन्ना मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने तंज कसते हुए कहा कि विपक्ष को ‘बोतल’ की चिंता ज्यादा हो रही है और शायद उसी के दाम बढ़ने से उन्हें दिक्कत है।
मंत्री की इस टिप्पणी पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने हल्के अंदाज में पूछा, “कौन सी बोतल?” इस टिप्पणी के बाद सदन में जोरदार ठहाके गूंज उठे और कुछ समय के लिए माहौल हल्का हो गया। हालांकि, इस हास्यपूर्ण क्षण के बावजूद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तकरार जारी रही। मंत्री चौधरी ने आगे कहा कि यदि नेता प्रतिपक्ष कीमतों में वृद्धि का मुद्दा उठाते हैं, तो सरकार उस पर विचार करने को तैयार है।
स्थिति को संभालते हुए अध्यक्ष महाना ने कहा कि दोनों पक्षों ने ‘बोतल’ शब्द का इस्तेमाल किया है और दोनों ने अपने-अपने संदर्भ में इसे समझा है। उनके इस संतुलित बयान ने कुछ समय के लिए सदन की स्थिति को नियंत्रित किया, लेकिन राजनीतिक तंज और आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी रहा।
इसी बीच समाजवादी पार्टी ने बेरोजगारी का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया। विपक्ष ने सवाल किया कि जब सरकार पर्याप्त नौकरियां नहीं दे पा रही है, तो क्या वह पूर्व की तरह बेरोजगारी भत्ता देने पर विचार करेगी। इस पर मंत्री अनिल राजभर ने स्पष्ट रूप से कहा कि सरकार फिलहाल बेरोजगारी भत्ता देने की कोई योजना नहीं बना रही है।
मंत्री के इस जवाब से असंतुष्ट होकर वरिष्ठ नेता माता प्रसाद ने सपा विधायकों से वॉकआउट करने का आह्वान किया। विपक्षी विधायक अपनी सीटों से उठकर बाहर जाने लगे, तभी अध्यक्ष सतीश महाना ने हल्के और विनोदी अंदाज में कहा कि “जाने का मन नहीं है तो बैठ जाइए, आज सत्र का अंतिम दिन है, मैं चाहता हूं कि सभी सदस्य सदन में मौजूद रहें।”
अध्यक्ष की इस टिप्पणी के कुछ ही क्षण बाद सपा के विधायक वापस अपनी सीटों पर लौट आए। इस तरह महंगाई पर शुरू हुई गंभीर बहस ‘बोतल’ वाले तंज, शायरी और ठहाकों के बीच राजनीतिक नोकझोंक के साथ आगे बढ़ती रही, जिसने बजट सत्र के अंतिम दिन सदन की कार्यवाही को एक अलग ही रंग दे दिया।
UP – Piyush Dhar Diwedi


