नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने वीर दामोदर सावरकर को भारत रत्न देने की मांग को जोरदार समर्थन दिया। उन्होंने कहा, ‘अगर वीर सावरकर को भारत रत्न प्रदान किया जाता है, तो इससे इस सर्वोच्च नागरिक सम्मान का मान-प्रतिष्ठा और बढ़ेगा।’ यह बयान स्वतंत्रता सेनानी सावरकर के योगदान को लेकर लंबे समय से चल रही बहस के बीच आया है, जहां उनके समर्थक उन्हें हिंदुत्व के प्रणेता और आजादी के गुमनाम नायक मानते हैं।
भागवत ने एक कार्यक्रम में बोलते हुए सावरकर के बलिदान और राष्ट्रवादी विचारधारा की सराहना की। उन्होंने कहा कि सावरकर ने काला पानी की सजा काटी, अनगिनत किताबें लिखीं और हिंदू समाज को संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ‘वे स्वराज के प्रतीक थे। उनका सम्मान भारत का सम्मान है। भारत रत्न देना उनके योगदान को औपचारिक मान्यता देगा, न कि इसे कम करेगा।’ भागवत ने केंद्र सरकार से अपील की कि ऐतिहासिक अन्याय को सुधारते हुए सावरकर को यह सम्मान दिया जाए।
सावरकर विवाद की पृष्ठभूमि
वीर सावरकर को भारत रत्न न मिलने का मुद्दा दशकों से विवादास्पद रहा है। 1858 में जन्मे सावरकर ‘अभिनव भारत’ के संस्थापक थे और ‘द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस 1857’ जैसी पुस्तक लिखी। अंडमान की सेलुलर जेल में 27 साल की कैद झेली। उनके आलोचक उन पर ब्रिटिशों से दया याचिका देने का आरोप लगाते हैं, जबकि समर्थक इसे रणनीतिक कदम बताते हैं। बीजेपी और हिंदू संगठन लंबे समय से भारत रत्न की मांग कर रहे हैं। हाल ही में महाराष्ट्र सरकार ने सावरकर को ‘महापुरुष’ घोषित किया था।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
भागवत के बयान पर बीजेपी ने स्वागत किया। केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘सावरकर राष्ट्रभक्त थे, उनका सम्मान जरूरी।’ वहीं, विपक्ष ने इसे राजनीतिक स्टंट बताया। कांग्रेस नेता बोले, ‘सावरकर को गांधी-नेहरू से ऊपर रखने की साजिश।’ आरएसएस का यह बयान लोकसभा चुनावों से पहले आया है, जहां हिंदुत्व मुद्दे गरम हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत रत्न घोषणा से सरसंघ का एजेंडा मजबूत होगा।
मोहन भागवत ने युवाओं से अपील की कि सावरकर के जीवन से प्रेरणा लें। क्या केंद्र सरकार इस मांग पर कदम उठाएगी? राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। सावरकर को भारत रत्न मिलना इतिहास का नया अध्याय लिख सकता है।
Correspondent – Shanwaz Khan


