Friday, March 6, 2026
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32 घंटे बाद खुला मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे, गैस टैंकर हादसे ने थाम दी रफ्तार, प्रशासन की तैयारियों पर उठे गंभीर सवाल

महाराष्ट्र के सबसे व्यस्त और अहम मार्गों में शामिल मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे पर आखिरकार करीब 32 घंटे बाद यातायात पूरी तरह बहाल हो सका। एक प्रोपाइलीन गैस से भरे टैंकर के पलटने के बाद यह हाईवे लंबे समय तक बंद रहा, जिससे हजारों वाहन फंस गए और यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। टैंकर को सुरक्षित तरीके से हटाने के बाद रास्ता खोला गया, लेकिन इस पूरी घटना ने प्रशासन की आपातकालीन व्यवस्था और टोल के बदले मिलने वाली सुविधाओं पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

मंगलवार शाम करीब पांच बजे यह हादसा उस समय हुआ जब टैंकर तेज रफ्तार में एक्सप्रेसवे पर जा रहा था। अचानक संतुलन बिगड़ने से टैंकर पलट गया और उसमें भरी प्रोपाइलीन गैस के कारण पूरे इलाके में खतरे की स्थिति बन गई। यह रसायन बेहद ज्वलनशील होता है, इसलिए जरा-सी चिंगारी भी बड़े विस्फोट में बदल सकती थी। इसी वजह से प्रशासन ने तुरंत एक्सप्रेसवे पर यातायात पूरी तरह रोक दिया।

शुरुआत में यात्रियों ने इसे सुरक्षा की दृष्टि से सही फैसला माना, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, जाम की स्थिति भयावह होती चली गई। कई किलोमीटर तक वाहनों की कतारें लग गईं। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ी। लोग रातभर अपनी गाड़ियों में बैठे रहे, न ठीक से खाना मिल पाया और न ही शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं।

करीब डेढ़ दिन बाद जब टैंकर को क्रेन और विशेषज्ञ टीम की मदद से हटाया गया, तब जाकर राहत की उम्मीद जगी। लेकिन मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं। खंडाला के आगे तो यातायात कुछ हद तक सामान्य हुआ, मगर मलवली के पास एक ट्रक खराब हो जाने से फिर लंबा जाम लग गया। वहीं कामशेत इलाके में कई भारी वाहन चालकों के गाड़ियों में ही सो जाने से ट्रैफिक पूरी तरह थम गया। महामार्ग पुलिस को खुद जाकर ड्राइवरों को जगाना पड़ा, तब कहीं जाकर गाड़ियां आगे बढ़ सकीं।

करीब 32 घंटे बाद आखिरकार मुंबई की ओर जाने वाला रास्ता पूरी तरह खोल दिया गया और धीरे-धीरे जाम कम होने लगा। हालांकि यात्रियों का गुस्सा साफ नजर आ रहा था। लोगों का कहना था कि इतने अहम एक्सप्रेसवे पर किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन के पास ठोस और तेज व्यवस्था होनी चाहिए थी।

इस पूरे मामले पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लगभग 32 घंटे तक एक्सप्रेसवे बंद रहा और यात्रियों को बेहाल होना पड़ा, लेकिन सरकार की ओर से हमेशा की तरह सिर्फ जांच के आदेश ही दिए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या प्रशासन के पास ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए कोई ठोस एक्शन प्लान है या नहीं।

राज ठाकरे ने यह भी याद दिलाया कि स्वर्गीय बालासाहेब ठाकरे की प्रेरणा से बने इस एक्सप्रेसवे को करीब 24 साल हो चुके हैं, लेकिन आज भी आपात स्थितियों से निपटने की तैयारी नाकाफी है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर किसी काम में तेजी दिखी तो वह सिर्फ टोल वसूली में। सवाल यह है कि यात्रियों को टोल के बदले आखिर कौन-सी सुविधाएं मिल रही हैं।

उन्होंने मांग की कि जिन यात्रियों से इस दौरान टोल लिया गया है, वह राशि उन्हें वापस की जानी चाहिए। साथ ही सरकार को चाहिए कि दिखावटी जांच के बजाय ठोस योजना बनाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर तुरंत और प्रभावी कार्रवाई हो सके।

वहीं इस मामले पर महाराष्ट्र सरकार के मंत्री गिरीश महाजन ने प्रशासन का बचाव किया। उन्होंने कहा कि टैंकर में भरा प्रोपाइलीन बेहद खतरनाक रसायन था, जिसे तुरंत हटाना संभव नहीं था। हल्की-सी चिंगारी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती थी। इसी वजह से विशेषज्ञ टीम को बुलाया गया और पूरी सावधानी के साथ टैंकर को हटाने की प्रक्रिया की गई।

उनके अनुसार क्रेन तुरंत भेजी गई थी, लेकिन सुरक्षा कारणों से काम धीरे-धीरे करना पड़ा। बीपीसीएल की विशेषज्ञ टीम ने मौके पर पहुंचकर रसायन को सुरक्षित तरीके से संभाला, जिसके बाद एक-एक लेन खोलकर यातायात शुरू किया गया।

यह हादसा एक बार फिर दिखाता है कि देश के प्रमुख एक्सप्रेसवे पर आपातकालीन व्यवस्था कितनी कमजोर है। मुंबई और पुणे जैसे बड़े शहरों को जोड़ने वाला यह मार्ग लाखों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है। अगर यहां किसी दुर्घटना में घंटों नहीं बल्कि दिनों तक जाम लग जाए, तो इसका असर पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की दिनचर्या पर पड़ता है।

यात्रियों का कहना है कि सरकार को सिर्फ बयान देने और जांच के आदेश देने से आगे बढ़कर स्थायी समाधान खोजने चाहिए। एक्सप्रेसवे पर मेडिकल सहायता, फूड सप्लाई, मोबाइल टॉयलेट और तेज रेस्क्यू सिस्टम जैसी सुविधाएं हर वक्त तैयार रहनी चाहिए।

अब बड़ा सवाल यही है कि क्या यह हादसा प्रशासन के लिए एक सबक बनेगा या फिर अगली बड़ी परेशानी तक सब कुछ यूं ही चलता रहेगा। जनता को सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि ऐसा सिस्टम चाहिए जो मुश्किल वक्त में उनके साथ खड़ा नजर आए और उनका सफर सुरक्षित व समय पर पूरा हो सके।

Correspondent – Shanwaz Khan

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