उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से सामने आई तीन सगी बहनों की आत्महत्या की घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। नौवीं मंजिल से कूदकर जान देने वाली ये तीनों नाबालिग बहनें पिछले कुछ वर्षों से कोरियन ड्रामा और वीडियो गेम्स की दुनिया में इस कदर खो चुकी थीं कि उन्हें अपनी पहचान तक से नफरत होने लगी थी। पिता का कहना है कि उनकी बेटियों के दिमाग पर “कोरिया” ऐसा सवार था कि वे भारत से जुड़ी हर चीज से दूरी बनाने लगी थीं।
घटना के बाद मीडिया से बात करते हुए पिता बेहद भावुक नजर आए। उन्होंने बताया कि उनकी बेटियां लगातार कोरिया जाने की जिद करती थीं। उन्हें अपने भारतीय नाम पसंद नहीं थे और उन्होंने अपने नाम तक बदल लिए थे। घर में कोरियन स्टाइल कपड़े पहनना, वैसा ही बोलने की कोशिश करना और कोरियन ड्रामा देखना उनकी दिनचर्या बन चुकी थी। पिता के अनुसार, बेटियों को “इंडियन” शब्द से भी गुस्सा आ जाता था और वे भारत से जुड़ी चीजों को नापसंद करने लगी थीं।
पिता ने बताया कि पिछले तीन-चार सालों से वे लगातार मोबाइल पर कोरियन ड्रामा और डांस वीडियो देखती थीं। ट्यूशन से लेकर घर तक, हर वक्त मोबाइल उनके हाथ में रहता था। अगर किसी कारण से मोबाइल उनसे ले लिया जाता या उनकी प्रोफाइल फोटो बदल दी जाती, तो वे खाना तक नहीं खाती थीं। उनका कहना था कि अगर उन्हें कोरिया नहीं भेजा गया तो वे पढ़ाई भी नहीं करेंगी।
घटना वाली रात का जिक्र करते हुए पिता ने बताया कि उन्होंने शाम को करीब सात बजे बेटियों से मोबाइल फोन ले लिया था। रात दस बजे उन्होंने फिर से फोन लिया और देर रात तक वीडियो देखती रहीं। करीब बारह बजे मां ने फोन वापस ले लिया, जिसके बाद तीनों बहनें मंदिर वाले कमरे में गईं और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। कुछ समय बाद जब घर में सन्नाटा छाया तो किसी को अंदाजा भी नहीं था कि वे ऐसा खौफनाक कदम उठा चुकी हैं। बाद में तीनों के शव नीचे मिले।
पिता का कहना है कि बेटियों ने सुसाइड नोट में लिखा था, “पापा आपने हमारा कोरिया छीन लिया।” यह लाइन उनके लिए जिंदगी भर का दर्द बन गई है। उन्होंने सरकार से मांग की कि बच्चों को नशे की तरह लत लगाने वाले कोरियन ड्रामा और वीडियो कंटेंट पर रोक लगाई जाए, ताकि कोई और परिवार ऐसा दुख न झेले।
हालांकि इस मामले में एक एंगल पिता पर कर्ज का भी सामने आया है। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें करीब 20 से 30 लाख रुपये का नुकसान हुआ था, लेकिन उनका कहना है कि अगर आर्थिक परेशानी आत्महत्या की वजह होती तो वे खुद ऐसा कदम उठाते, न कि उनकी मासूम बेटियां। उनके मुताबिक तीनों बहनें हर काम साथ करती थीं — साथ खाना, साथ पढ़ाई और साथ खेलना। वे रात-रात भर मोबाइल पर गेम खेलती रहती थीं।
यह घटना आज के दौर में बच्चों पर डिजिटल कंटेंट के बढ़ते असर की गंभीर चेतावनी है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार विदेशी संस्कृति और वर्चुअल दुनिया में डूबे रहना बच्चों की मानसिक स्थिति पर गहरा असर डाल सकता है। जरूरत है कि माता-पिता समय रहते बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें और उनसे खुलकर बात करें।
गाजियाबाद की यह दर्दनाक घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि समाज के लिए एक बड़ा सवाल है — क्या हम अपने बच्चों को मोबाइल की दुनिया में खोते हुए देख रहे हैं और समय रहते कुछ कर पा रहे हैं या नहीं?
Correspondent – Shanwaz Khan


