आम बजट 2026 में केंद्र सरकार ने शहरी विकास को नई दिशा देते हुए उत्तर प्रदेश के टियर-2 और टियर-3 शहरों के लिए बड़ा ऐलान किया है। इस बार बजट का फोकस सिर्फ बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि छोटे और मझोले शहरों को भी विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए 5,000 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया गया है। इससे प्रदेश के करीब 45 शहरों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है, जिनके लिए लगभग 900 करोड़ रुपये तक की हिस्सेदारी तय मानी जा रही है।
सरकार का उद्देश्य है कि शहरों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जाए और रोजगार के नए अवसर पैदा हों। सड़कें चौड़ी और बेहतर हों, बिजली-पानी की आपूर्ति सुचारु हो और सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक बनाया जाए। इससे न सिर्फ जीवन स्तर सुधरेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।
पर्यटन और धार्मिक शहरों पर खास जोर
बजट में उन शहरों को विशेष प्राथमिकता दी गई है जो पर्यटन और धार्मिक दृष्टि से अहम हैं। इनमें प्रमुख रूप से अयोध्या जैसे शहर शामिल हैं। यहां सड़क नेटवर्क, होटल सुविधाएं, साफ-सफाई और डिजिटल सेवाओं पर तेजी से काम किया जाएगा, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके और स्थानीय लोगों को रोजगार के नए साधन मिलें।
टियर-2 शहरों की बदलेगी रफ्तार
प्रदेश के जिन टियर-2 शहरों को इस योजना में शामिल किया गया है, उनमें लखनऊ, कानपुर, आगरा, वाराणसी, प्रयागराज, मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, गोरखपुर, बरेली, अलीगढ़, मुरादाबाद, सहारनपुर, झांसी और मथुरा शामिल हैं। इन शहरों में स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रैफिक मैनेजमेंट और सार्वजनिक सेवाओं को बेहतर बनाने पर जोर रहेगा।
लोकल फंडिंग से बढ़ेगा विकास
बजट में म्युनिसिपल बॉन्ड के दायरे को भी बढ़ाया गया है। अब नगर निगमों के साथ-साथ नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतें भी बॉन्ड जारी कर सकेंगी। इससे स्थानीय स्तर पर विकास परियोजनाओं के लिए सीधे फंड जुटाना आसान होगा और यूपी की 300 से ज्यादा शहरी इकाइयों को इसका फायदा मिल सकता है।
कुल मिलाकर बजट 2026 उत्तर प्रदेश के छोटे और मध्यम शहरों के लिए नई उम्मीद लेकर आया है। अगर योजनाएं जमीन पर सही तरीके से लागू होती हैं, तो आने वाले वर्षों में इन शहरों की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।
Correspondent – Shanwaz Khan


