बरेली में यूजीसी और शंकराचार्य विवाद के विरोध में एसडीएम पद से इस्तीफा देने वाले पूर्व अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री रविवार को वाराणसी पहुंचे। यहां उन्होंने प्रसिद्ध संत शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद अलंकार अग्निहोत्री ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए एससी-एसटी एक्ट को लेकर बड़ा आंदोलन छेड़ने का एलान किया।
उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि एससी-एसटी एक्ट का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो रहा है। उनका दावा था कि इस कानून के तहत दर्ज होने वाले करीब 95 प्रतिशत मामले झूठे होते हैं, जिनका इस्तेमाल निर्दोष लोगों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और आर्थिक रूप से फंसाने के लिए किया जाता है। उन्होंने कहा कि केवल एक शिकायत के आधार पर लोगों से लाखों रुपये तक वसूले जाने के मामले सामने आते हैं, जो न्याय व्यवस्था के लिए बेहद चिंताजनक हैं।
अलंकार अग्निहोत्री ने साफ कहा कि यदि सरकार ने 6 फरवरी तक इस कानून में बदलाव या इसे वापस लेने पर कोई कदम नहीं उठाया, तो वे दिल्ली कूच करेंगे और संसद सत्र के दौरान जोरदार प्रदर्शन करेंगे। उनके मुताबिक लखनऊ में वे जल्द ही एससी-एसटी एक्ट से जुड़े कथित फर्जी मामलों का विस्तृत डेटा सार्वजनिक करेंगे, ताकि आम लोगों को इस कानून के दुरुपयोग की सच्चाई समझाई जा सके।
पूर्व अधिकारी ने यह भी दावा किया कि मौजूदा सरकार अब जनसमर्थन खो चुकी है। उन्होंने कहा कि यूजीसी के नए नियमों और बिल के बाद बड़ी संख्या में लोग सरकार से नाराज हैं। उनका अनुमान है कि जनरल और ओबीसी वर्ग के लगभग 85 प्रतिशत लोग इन फैसलों के खिलाफ हैं और अगर सरकार ने इन्हें वापस नहीं लिया, तो देशभर में आंदोलन तेज होगा।
यूजीसी गाइडलाइंस को लेकर भी अलंकार अग्निहोत्री ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि इन नियमों से शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ टूट रही है और यह भारत की आत्मा पर हमला है। उनका मानना है कि सरकार शिक्षा और सामाजिक न्याय दोनों मोर्चों पर गलत दिशा में जा रही है।
अंत में उन्होंने दो टूक कहा कि अब चुप बैठने का समय खत्म हो चुका है। अगर सरकार जनता की आवाज नहीं सुनती, तो 7 फरवरी से देशभर में व्यापक आंदोलन शुरू होगा। उनका कहना है कि यह लड़ाई केवल एक कानून के खिलाफ नहीं, बल्कि न्याय और लोकतंत्र को बचाने के लिए है।
Correspondent – Shanwaz Khan


