Wednesday, March 4, 2026
Google search engine
Homeटॉप स्टोरीयूपी फिर बंटेगा? 28 जिलों को मिलाकर पूर्वांचल राज्य की मांग तेज,...

यूपी फिर बंटेगा? 28 जिलों को मिलाकर पूर्वांचल राज्य की मांग तेज, बीजेपी नेताओं की पहल से सियासी हलचल

उत्तर प्रदेश के बंटवारे की मांग एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गई है। बीते कुछ महीनों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अलग राज्य की आवाज उठने के बाद अब पूर्वांचल से भी इस मुद्दे को नई धार मिली है। अमेठी जिले के ददन सदन में बुधवार, 21 जनवरी 2026 को आयोजित खिचड़ी भोज एवं स्नेह मिलन कार्यक्रम के दौरान पृथक पूर्वांचल राज्य के गठन की मांग खुलकर सामने आई। इस कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता डॉ. संजय सिंह तथा पूर्व प्राविधिक शिक्षा मंत्री डॉ. अमीता सिंह ने मंच से स्पष्ट शब्दों में कहा कि पूर्वांचल का सर्वांगीण विकास तभी संभव है, जब इसे अलग राज्य का दर्जा दिया जाए।

कार्यक्रम में हजारों की संख्या में मौजूद लोगों ने इस मांग का समर्थन किया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि यह मुद्दा अब केवल राजनीतिक मंचों तक सीमित नहीं, बल्कि जनभावनाओं से भी जुड़ता जा रहा है।

“एक राज्य, एक प्रशासन अब संभव नहीं” – डॉ. संजय सिंह

एबीपी न्यूज़ से बातचीत में डॉ. संजय सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है, जहां एक ही प्रशासनिक ढांचे के तहत सुशासन लागू करना दिन-ब-दिन कठिन होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की आबादी कई देशों से अधिक है, ऐसे में विकास योजनाओं का समान और प्रभावी क्रियान्वयन संभव नहीं हो पाता।

डॉ. सिंह के अनुसार, लोकतंत्र और विकास दोनों तब प्रभावित होते हैं, जब प्रशासनिक व्यवस्था अत्यधिक बोझिल हो जाती है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि पूर्वांचल के लोगों के बेहतर भविष्य, रोजगार के अवसरों और प्रभावी प्रशासन के लिए अलग राज्य का गठन किया जाए।

प्रस्तावित पूर्वांचल राज्य में 28 जिले

डॉ. संजय सिंह ने बताया कि प्रस्तावित पूर्वांचल राज्य में उत्तर प्रदेश के 8 मंडलों के 28 जिलों को शामिल किया जाएगा। इनमें वाराणसी, चंदौली, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, प्रयागराज, कौशाम्बी, प्रतापगढ़, मिर्जापुर, सोनभद्र, भदोही, अयोध्या, अकबरपुर, सुल्तानपुर, अमेठी, गोंडा, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती, गोरखपुर, महाराजगंज, देवरिया, कुशीनगर, बस्ती, सिद्धार्थनगर और संत कबीर नगर शामिल होंगे।

उन्होंने बताया कि लगभग 7 करोड़ 98 लाख की आबादी के साथ यह राज्य देश का 14वां सबसे बड़ा राज्य होगा। डॉ. सिंह ने दावा किया कि यदि राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई जाए, तो यह राज्य 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अस्तित्व में आ सकता है।

संयुक्त संकल्प मंच से चलेगा आंदोलन

डॉ. संजय सिंह ने घोषणा की कि “पूर्वांचल राज्य संयुक्त संकल्प मंच” के माध्यम से इस मांग को संगठित और प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने पूर्वांचल राज्य के लिए संघर्ष कर रहे सभी सामाजिक, राजनीतिक और वैचारिक संगठनों से एकजुट होने का आह्वान किया।

उनका कहना था कि जब तक यह मुद्दा राष्ट्रीय पटल पर मजबूती से नहीं उठेगा, तब तक पूर्वांचल की समस्याओं का स्थायी समाधान संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और जनसमर्थन के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।

भाषाई-सांस्कृतिक पहचान और उपेक्षा का सवाल – डॉ. अमीता सिंह

पूर्व मंत्री और बीजेपी नेता डॉ. अमीता सिंह ने कहा कि पूर्वांचल की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों से अलग है। इसके बावजूद यह क्षेत्र दशकों से प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार रहा है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों, उपजाऊ भूमि और मेहनती मानव संसाधन के बावजूद पूर्वांचल सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ता चला गया।

डॉ. अमीता सिंह ने कहा कि कृषि, उद्योग और शिक्षा के क्षेत्र में विशेष नीति के अभाव में यहां से बड़े पैमाने पर पलायन हो रहा है। युवा रोजगार की तलाश में दिल्ली, मुंबई, सूरत, लुधियाना और विदेशों तक जा रहे हैं, जबकि उनका अपना क्षेत्र विकास से वंचित रह जाता है।

बाढ़, सूखा और जल प्रबंधन की समस्या

उन्होंने कहा कि नेपाल से आने वाली नदियों के जल प्रबंधन के लिए कोई ठोस और दीर्घकालिक नीति नहीं है। इसके कारण हर वर्ष पूर्वांचल को कभी बाढ़ तो कभी सूखे की समस्या का सामना करना पड़ता है। खेती, पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था इससे बुरी तरह प्रभावित होती है।

डॉ. अमीता सिंह के अनुसार, अलग राज्य बनने पर स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार नीति निर्माण संभव होगा, जिससे इन समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जा सकेगा।

शिक्षा, स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर में पिछड़ापन

उन्होंने यह भी कहा कि पूर्वांचल में उच्च शिक्षा संस्थानों, आधुनिक अस्पतालों और बेहतर सड़क, रेल व औद्योगिक ढांचे की भारी कमी है। अलग राज्य बनने पर केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर विशेष बजट और योजनाएं लागू की जा सकेंगी, जिससे क्षेत्र को नई दिशा मिलेगी।

संसाधनों से भरपूर है पूर्वांचल

डॉ. अमीता सिंह ने बताया कि पूर्वांचल देश का बड़ा विद्युत उत्पादन केंद्र है। मिर्जापुर और सोनभद्र जैसे जिले खनिज संपदा से भरपूर हैं। अयोध्या, काशी और प्रयागराज जैसे धार्मिक केंद्र, साथ ही सारनाथ, कुशीनगर, श्रावस्ती और कपिलवस्तु जैसे बौद्ध पर्यटन स्थल पूर्वांचल को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन और विदेशी मुद्रा अर्जन का बड़ा केंद्र बना सकते हैं।

उनका कहना था कि यदि इन संसाधनों का सही उपयोग हो, तो पूर्वांचल देश की आर्थिक रीढ़ बन सकता है।

भावुक अपील: “हमें पूर्वांचल दीजिए…”

डॉ. अमीता सिंह ने भावुक अपील करते हुए कहा,
“मुंबई, सूरत, लुधियाना, सिंगापुर, दुबई, मॉरीशस और सिलिकॉन वैली में पूर्वांचल के लोग अपनी मेहनत का परचम लहरा रहे हैं। हमें पूर्वांचल राज्य दे दीजिए, हम भारत को जापान बनाने की शक्ति, सामर्थ्य और संकल्प रखते हैं।”

उनके इस बयान पर कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों ने जोरदार तालियों के साथ समर्थन जताया।

नेताओं और जनता की बड़ी मौजूदगी

इस कार्यक्रम में बीजेपी के पूर्व जिला अध्यक्ष रामप्रसाद मिश्रा, एडवोकेट उमाशंकर पांडेय, पूर्व विधायक तेजभान सिंह, एमएलसी शैलेंद्र प्रताप सिंह, भाजपा नेता चंद्र प्रकाश मिश्र ‘मटियारी’, आरएसएस के जिला प्रचारक पवन जी सहित कई प्रमुख नेता और बड़ी संख्या में आम लोग मौजूद रहे। सभी ने पूर्वांचल राज्य की मांग को मजबूती से आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

बीजेपी के लिए नई मुश्किल?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मांग बीजेपी के लिए अंदरूनी तौर पर चुनौती बन सकती है। अब तक बीजेपी नेतृत्व उत्तर प्रदेश के बंटवारे का विरोध करता रहा है। पार्टी का आधिकारिक रुख रहा है कि उत्तर प्रदेश एकजुट रहकर ही अपनी पूरी क्षमता के साथ विकास कर सकता है।

सीएम योगी का स्पष्ट रुख

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही उत्तर प्रदेश के बंटवारे की मांग को खारिज कर चुके हैं। उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा था कि उत्तर प्रदेश अपनी एक विशिष्ट पहचान रखता है और इसमें अपार संभावनाएं निहित हैं। उनका मानना है कि प्रदेश को एकजुट रहकर ही अपने विकास और लक्ष्यों को हासिल करना चाहिए।

सीएम योगी के अनुसार, एकता में ही उत्तर प्रदेश की वास्तविक ताकत, पहचान और सम्मान निहित है। उन्होंने राज्य के विभाजन को समाधान नहीं, बल्कि नई चुनौतियों को जन्म देने वाला कदम बताया था।

आगे क्या?

अब सवाल यह है कि क्या पूर्वांचल राज्य की यह मांग केवल एक राजनीतिक बयानबाजी बनकर रह जाएगी, या वास्तव में यह आंदोलन एक संगठित रूप लेकर केंद्र सरकार तक पहुंचेगा। आने वाले दिनों में “पूर्वांचल राज्य संयुक्त संकल्प मंच” किस तरह इस मुद्दे को आगे बढ़ाता है, इस पर सबकी नजर रहेगी।

फिलहाल इतना तय है कि उत्तर प्रदेश के बंटवारे की बहस एक बार फिर तेज हो चुकी है, और यह बहस आने वाले चुनावों में राजनीतिक समीकरणों को जरूर प्रभावित कर सकती है।

Correspondent – Shanwaz khan

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments