मुंबई। बीएमसी समेत महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव नतीजे घोषित होने के बाद राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। मुंबई महानगरपालिका (BMC) के मेयर पद को लेकर जहां बीजेपी ने खुलकर दावा ठोक दिया है, वहीं महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने भी साफ कर दिया है कि मुंबई में महायुति का ही महापौर होगा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि पद से ज्यादा जरूरी है मुंबई का सर्वांगीण विकास।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए एकनाथ शिंदे ने मुंबईकरों के जनादेश को महायुति के लिए बड़ी सफलता बताया। उन्होंने कहा कि जनता ने भावनात्मक मुद्दों के बजाय विकास को प्राथमिकता दी है और यही इस चुनाव का सबसे बड़ा संदेश है।
“मेयर पद से ज्यादा जरूरी मुंबई का भविष्य”
एकनाथ शिंदे ने कहा,
“महापौर पद से ज्यादा जरूरी है कि मुंबई वैसी दिखे जैसी उसे होना चाहिए। हम मुंबई को एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का शहर बनाना चाहते हैं। महायुति का ही महापौर होगा और हम मुंबईकरों के जनादेश को पूरी तरह स्वीकार करते हैं। यह हमारी सामूहिक जीत है।”
उन्होंने यह भी कहा कि मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है और 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य में मुंबई की भूमिका सबसे अहम है। इसलिए यहां विकास कार्यों में कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
“महायुति में कोई बड़ा-छोटा भाई नहीं”
गठबंधन को लेकर शिंदे ने स्पष्ट किया कि महायुति में किसी तरह का वर्चस्व नहीं है।
उन्होंने कहा,
“हमारे गठबंधन में कोई बड़ा भाई या छोटा भाई नहीं है। सबका लक्ष्य एक ही है — जनता का विकास। शिवसेना और बीजेपी ने मिलकर यह चुनाव लड़ा और जनता ने हमें स्वीकार किया है।”
उन्होंने बालासाहेब ठाकरे को याद करते हुए कहा कि बालासाहेब केवल एक ही थे और वही असली ब्रांड थे। आज कोई भी उनकी जगह नहीं ले सकता।
ठाणे और मुंबई में महायुति की मजबूत स्थिति
डिप्टी सीएम ने बताया कि ठाणे में शिवसेना-बीजेपी गठबंधन को शानदार समर्थन मिला है।
“ठाणे में 71 सीटों पर जीत मिली है और हम 75 तक पहुंचेंगे। मुंबई में भी शिवसेना और बीजेपी बहुमत के करीब हैं। माहौल पूरी तरह महायुति के पक्ष में है।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि मुंबई में शिवसेना ने अच्छी बढ़त बनाई है और बीएमसी में महायुति का ही महापौर बैठेगा।
“25 साल सत्ता में रहने वालों को जनता ने नकारा”
एकनाथ शिंदे ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता ने लंबे समय तक सत्ता में रहने वालों को नकार दिया है।
“यह परफॉर्मेंस आधारित जनादेश है। जनता ने देखा कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में हमने मुंबई के लिए क्या काम किया। रुकी हुई परियोजनाओं को फिर से शुरू किया गया, मेट्रो को गति दी गई और बुनियादी सुविधाओं पर खास ध्यान दिया गया।”
उन्होंने कहा कि चुनाव को भावनात्मक मुद्दों और मराठी कार्ड पर जीतने की कोशिश की गई, लेकिन जनता ने विकास को ही असली ब्रांड माना।
मुंबई के लिए बड़ी योजनाओं का जिक्र
शिंदे ने मुंबई में किए गए और प्रस्तावित विकास कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि:
- पूरी मुंबई को गड्ढामुक्त किया जाएगा।
- एसटीपी प्लांट बनाए जा रहे हैं ताकि जल प्रदूषण कम हो।
- मेट्रो परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
- वाटर टैक्सी जैसी नई सुविधाओं पर काम हो रहा है।
- रिंग रोड और ठाणे-बोरीवली टनल से यातायात जाम में राहत मिली है।
उन्होंने कहा कि ट्रिपल इंजन सरकार के जरिए मुंबई के विकास को नई गति मिलेगी।
ठाकरे और हिंदुत्व पर बयान
हिंदुत्व के सवाल पर एकनाथ शिंदे ने कहा,
“हिंदुत्व हमारी विचारधारा है, लेकिन चुनाव में हमने उसका इस्तेमाल नहीं किया। हमने विकास के मुद्दों पर चुनाव लड़ा।”
ठाकरे के भविष्य को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने मुस्कराते हुए कहा,
“मैं कोई ज्योतिषी नहीं हूं जो भविष्य बता सकूं। हम काम करते रहेंगे। भावनात्मक मुद्दों से चुनाव नहीं जीते जा सकते।”
लाडकी बहनों का योगदान
शिंदे ने यह भी माना कि ‘लाडकी बहन’ योजना और महिला मतदाताओं के समर्थन ने महायुति की जीत में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि महिलाओं का भरोसा ही गठबंधन की सबसे बड़ी ताकत है।
बीजेपी का भी दावा
इससे पहले बीजेपी नेता राहुल नार्वेकर ने भी साफ कहा था कि बीएमसी का मेयर बीजेपी का ही होगा। हालांकि, शिंदे ने इस पर संतुलित प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि महायुति के भीतर आपसी समन्वय से ही अंतिम फैसला लिया जाएगा।
निष्कर्ष
बीएमसी चुनाव नतीजों के बाद यह साफ हो गया है कि मुंबई की राजनीति में महायुति एक बार फिर मजबूत स्थिति में है। एकनाथ शिंदे के बयानों से यह संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में मेयर पद को लेकर भले ही राजनीतिक चर्चा जारी रहे, लेकिन गठबंधन का मुख्य फोकस मुंबई के विकास पर ही रहेगा।
मुंबईकरों के लिए अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या महायुति अपने वादों को जमीन पर उतार पाएगी और क्या मुंबई वास्तव में एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का शहर बन पाएगी। फिलहाल, चुनावी जनादेश ने महायुति को यह मौका जरूर दे दिया है।
Corrospondent – Shanwaz Khan


