मुंबई, 15 जनवरी 2026 : महाराष्ट्र महानगरपालिका चुनाव 2026 के मतदान से महज 24 घंटे पहले राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) को बॉम्बे हाईकोर्ट से करारा झटका लगा। कोर्ट ने MNS की निर्विरोध चुने गए 67 उम्मीदवारों के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया। MNS नेता अविनाश जाधव ने आरोप लगाया था कि पैसे और सत्ता के दम पर ये उम्मीदवार बिना विरोध के जीत गए, जो चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है।
याचिका में MNS ने दावा किया कि महानगरपालिका चुनावों में ज्यादातर सत्ताधारी दल के प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हो गए। कुल 67 उम्मीदवारों को बिना किसी मुकाबले के विजेता घोषित कर दिया गया। अविनाश जाधव ने कोर्ट से मांग की थी कि इन मामलों की जांच हाईकोर्ट के किसी सेवानिवृत्त जज से कराई जाए या फिर पूरी प्रक्रिया कोर्ट की निगरानी में हो। साथ ही, जांच पूरी होने तक इन उम्मीदवारों को विजेता न घोषित किया जाए। लेकिन जस्टिस ने याचिका को सुनवाई योग्य नहीं मानते हुए खारिज कर दिया।
निर्विरोध चुनावों का विवाद क्यों?
महाराष्ट्र के विभिन्न महानगरपालिकाओं में चुनाव प्रक्रिया तेजी से चल रही है। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, कई सीटों पर नामांकन वापसी के बाद उम्मीदवारों के अभाव में निर्विरोध घोषणा हो गई। MNS का कहना है कि यह लोकतंत्र की हत्या है, क्योंकि सत्ता पक्ष के दबाव और धनबल से विपक्षी दलों के उम्मीदवार पीछे हट गए। राज ठाकरे ने खुद सोशल मीडिया पर इसे ‘चुनावी चाल’ करार दिया, लेकिन कोर्ट के फैसले से पार्टी की रणनीति पर पानी फिर गया।
चुनाव का परिदृश्य
महाराष्ट्र में पुणे, नासिक, ठाणे समेत कई शहरों में मतदान कल होना है। सत्ताधारी महायुति (बीजेपी-शिवसेना-एनसीपी) और महाविकास अघाड़ी (कांग्रेस-शिवसेना यूबीटी-एनसीपी एससीपी) के बीच कांटे की टक्कर है। MNS जैसे क्षेत्रीय दल इसे अपनी जमीन मजबूत करने का मौका मान रहे थे, लेकिन कोर्ट का फैसला उनके लिए बड़ा झटका साबित हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्विरोध सीटें सत्ता पक्ष को फायदा पहुंचाएंगी। अब MNS बाकी सीटों पर पूरी ताकत झोंकने को तैयार है। क्या यह झटका राज ठाकरे की पार्टी को पटरी से उतार देगा? नतीजे जल्द ही सामने होंगे।
Corrospundent – Shanwaz khan


