Wednesday, March 4, 2026
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जब ‘नेताजी’ को बचानी पड़ी थी जान: जानिए कैसे टल गया मुलायम सिंह यादव का एनकाउंटर

उत्तर प्रदेश की राजनीति में किस्सों की कोई कमी नहीं, लेकिन 1984 का वह साल एक ऐसी हैरान कर देने वाली घटना लेकर आया जिसने राज्य की सत्ता और सियासत दोनों को झकझोर दिया। यह वही समय था जब समाजवादी आंदोलन के अगुवा और आगे चलकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने मुलायम सिंह यादव की जान पर बन आई थी। मीडिया रिपोर्ट्स और समकालीन राजनीतिक हलकों के मुताबिक उस दौर में उन पर ऐसा गंभीर आरोप लगा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने उनका एनकाउंटर करने तक का आदेश दे दिया था।

आरोपों ने मचाई थी सियासी हलचल

1984 में यूपी की राजनीति में वी.पी. सिंह कानून-व्यवस्था को सुधारने के लिए सख्त कदम उठा रहे थे। उन्होंने राज्यभर में अपराध और डकैती रोकने के लिए व्यापक “डकैती विरोधी अभियान” छेड़ा था। मुलायम सिंह यादव, जो उस वक्त विधायक और लोक दल के प्रदेश महासचिव थे, इस मुहिम में अचानक शक के घेरे में आ गए। सरकार को संदेह था कि उनका कुछ डकैत गिरोहों से संपर्क है। कुछ अफसरों ने यहां तक रिपोर्ट दी कि मुलायम सिंह के संपर्क में फूलन देवी जैसे अपराधियों को सहायता मिलती रही और उन्होंने उनके गिरोह की लूट का हिस्सा भी लिया।

इन आरोपों ने वी.पी. सिंह की सरकार को सख्त कार्रवाई के लिए उकसाया। कहा जाता है कि विशेष रिपोर्ट देखने के बाद मुख्यमंत्री ने पुलिस को ‘एनकाउंटर ऑर्डर’ जारी कर दिया। मुलायम सिंह उस समय यह कल्पना भी नहीं कर सकते थे कि कुछ ही घंटों में उनका नाम अपराधियों की सूची में शामिल हो जाएगा।

जब पुलिस की लीक ने बचाई जान

भाग्य ने इस मोड़ पर उनका साथ दिया। इटावा पुलिस के एक अधिकारी ने गुप्त रूप से मुलायम सिंह यादव को एनकाउंटर आदेश की जानकारी दे दी। यह खबर मिलते ही मुलायम सिंह समझ गए कि उनके पास समय बहुत कम है और किसी भी पल पुलिस दरवाजे पर पहुंच सकती है। उन्होंने बिना किसी से परामर्श किए, न परिजन को बताकर, न साथियों को खबर देकर, फौरन इटावा छोड़ने का कठिन निर्णय ले लिया।

बावजूद इसके कि वह एक लोकप्रिय विधायक थे, उन्होंने पहचान छिपाने के लिए कार या बस की बजाय साइकिल चुनी। बताया जाता है कि कच्ची पगडंडियों और गांवों के बीच से गुजरते हुए वे गुपचुप तरीके से दिल्ली की ओर निकल पड़े। उस समय पुलिस ट्रेन, बस स्टैंड और हाइवे पर उनकी तलाश में थी, लेकिन किसी को यह ख्याल नहीं आया कि एक कद्दावर नेता इतनी कठिन यात्रा साइकिल से कर रहा होगा।

दिल्ली में मिला चौधरी चरण सिंह का सहारा

दिल्ली पहुंचने पर मुलायम सिंह सीधे चौधरी चरण सिंह के घर पहुंचे। चरण सिंह, जिनसे उनका राजनीति और विचारधारा दोनों स्तर पर गहरा संबंध था, के सामने उन्होंने भावुक होकर सुरक्षा की गुहार लगाई। चरण सिंह ने स्थिति की गंभीरता समझते हुए तुरंत कदम उठाया और मुलायम सिंह यादव को लोक दल के उत्तर प्रदेश विधायक दल का नेता घोषित कर दिया।

यह निर्णय वी.पी. सिंह सरकार के पूरे परिदृश्य को बदल देने वाला साबित हुआ। अब वही मुलायम सिंह, जो पुलिस के ‘टारगेट’ पर थे, आधिकारिक रूप से एक वरिष्ठ राजनीतिक नेता बन गए। कानून के तहत उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी अब उसी पुलिस पर आ गई जो उन्हें खोज रही थी।

डर नहीं गया था पूरी तरह

राजनीतिक संरक्षण मिलने के बाद भी मुलायम सिंह तुरंत उत्तर प्रदेश लौटने का साहस नहीं जुटा सके। सूत्र बताते हैं कि उन्हें अब भी फर्जी एनकाउंटर का डर सता रहा था। इसलिए कुछ समय तक उन्होंने दिल्ली में ही चौधरी चरण सिंह के घर में शरण लिए रखी।

यह घटना मुलायम सिंह यादव के जीवन में एक मोड़ साबित हुई। जिस इंसान को कभी अपराधी समझा गया, वही आगे चलकर उत्तर प्रदेश की राजनीति का ‘नेताजी’ कहलाया और तीन बार मुख्यमंत्री बनकर जनता की सेवा की।

Corrospondent – Shanwaz Khan

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