Tuesday, March 3, 2026
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देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का निर्माण पूरा: 10 कोच, 2400 kW पावर और पूरी तरह स्वदेशी तकनीक की बड़ी उपलब्धि

भारतीय रेलवे ने पहली हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन तैयार करके हरित ऊर्जा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में लिखित जवाब देते हुए बताया कि देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन-सेट का निर्माण पूरा हो चुका है। यह ट्रेन न केवल भारत की पहली है, बल्कि दुनिया की सबसे लंबी और सबसे शक्तिशाली ब्रॉड-गेज हाइड्रोजन ट्रेन-सेट भी मानी जा रही है।

रेल मंत्री के अनुसार इस ट्रेन-सेट को रिसर्च, डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (RDSO) के मानकों के तहत तैयार किया गया है। पूरी तरह स्वदेशी डिजाइन और तकनीक पर आधारित यह ट्रेन आत्मनिर्भर भारत की दिशा में रेलवे के प्रयासों को मजबूती प्रदान करती है।

दुनिया की सबसे लंबी और सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेन

पहली हाइड्रोजन ट्रेन-सेट में कुल 10 कोच शामिल हैं—दो ड्राइविंग पावर कार (DPC) और आठ पैसेंजर कोच। दोनों पावर कार मिलकर कुल 2400 kW की शक्ति उत्पन्न करती हैं, जो इसे दुनिया की सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेन-सेट का दर्जा देती है। यह ट्रेन ब्रॉड गेज पर चलने वाली अपनी तरह की पहली उन्नत प्रणाली भी है।

रेल मंत्री ने बताया कि यह हाइड्रोजन ट्रेन पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल तकनीक पर आधारित है। संचालन के दौरान यह ट्रेन शून्य कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन करती है और इसका एकमात्र आउटपुट जलवाष्प होता है। इससे रेलवे के ग्रीन मिशन को महत्वपूर्ण प्रोत्साहन मिलेगा।

आठ पैसेंजर कोच, पूरी तरह हरित तकनीक

ट्रेन में लगाए गए आठ पैसेंजर कोच आधुनिक सुविधाओं और सुरक्षा मानकों पर आधारित हैं। हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक से चलने वाली यह ट्रेन परंपरागत ऊर्जा साधनों का एक स्वच्छ विकल्प प्रस्तुत करती है। भारतीय रेलवे इसे भविष्य की पर्यावरण–अनुकूल ट्रैक्शन तकनीक का आधार मान रहा है।

हरियाणा के जींद में बन रहा ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट

ट्रेन के सुरक्षित और सुचारू संचालन के लिए हाइड्रोजन की आपूर्ति अनिवार्य है। इसके लिए हरियाणा के जींद में इलेक्ट्रोलिसिस तकनीक आधारित ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन प्लांट स्थापित किया जा रहा है, जिससे हाइड्रोजन की घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित होगी।

पायलट प्रोजेक्ट, लागत तुलना उचित नहीं: रेल मंत्री

रेल मंत्री वैष्णव ने स्पष्ट किया कि यह रेलवे का पहला पायलट प्रोजेक्ट है। हाइड्रोजन ट्रैक्शन तकनीक, प्रोटोटाइप निर्माण और परियोजना के विकास की यह शुरुआती अवस्था है, इसलिए फिलहाल इसकी लागत की तुलना पारंपरिक ट्रैक्शन प्रणालियों से करना उचित नहीं होगा।

भारत की यह पहली हाइड्रोजन ट्रेन रेलवे के भविष्य की हरित और स्वच्छ प्रगति का नया अध्याय खोलने जा रही है।

Correspondent – Shanwaz khan

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