संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान सोमवार को लोकसभा में उस समय गर्मागरमी बढ़ गई, जब वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर चर्चा चल रही थी। इस अवसर पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह अपना संबोधन दे रहे थे। उनके भाषण के बीच एक ऐसा क्षण आया, जिसने सदन का माहौल अचानक तनावपूर्ण कर दिया। बात बढ़ते-बढ़ते हंगामे तक पहुंच गई और स्पीकर ओम बिड़ला को हस्तक्षेप करना पड़ा।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
सदन में राजनाथ सिंह वंदे मातरम् के इतिहास, उसकी राष्ट्रीय भूमिका और इससे जुड़ी भावनाओं पर विस्तार से बोल रहे थे। उन्होंने अपने भाषण के एक महत्वपूर्ण हिस्से में कहा कि भारतीय मुस्लिमों ने ‘वंदे मातरम्’ और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के भाव को गहराई से समझा और सम्मान दिया है।
यही वक्त था जब कुछ विपक्षी सांसदों ने आपत्ति जतानी शुरू कर दी। उनकी टिप्पणियों और शोरगुल से राजनाथ सिंह नाराज हो गए। विपक्ष के शोर के बीच उन्होंने गुस्से में कहा—
“कौन बैठाने वाला है मुझे? कौन बैठाएगा मुझे?”
और फिर स्पीकर से अनुरोध किया—
“अध्यक्ष महोदय, इन्हें शांत कराइए।”
यह टिप्पणी सदन में हलचल का कारण बन गई और विपक्षी सदस्य और उग्र हो गए।
स्पीकर ओम बिड़ला ने संभाली स्थिति
स्थिति बिगड़ती देख स्पीकर ओम बिड़ला ने हस्तक्षेप किया और विपक्षी सांसदों को अपनी सीटों पर बैठने तथा शांत रहने को कहा। बिड़ला ने स्पष्ट किया कि मंत्री अपना पक्ष रख रहे हैं और उन्हें बीच में बाधित नहीं किया जाना चाहिए। कुछ समय बाद माहौल शांत हुआ और चर्चा आगे बढ़ सकी।
राजनाथ सिंह ने आगे क्या कहा?
विपक्ष के शांत होने पर रक्षामंत्री ने अपना वक्तव्य जारी रखते हुए कहा कि भारतीय मुस्लिमों ने वंदे मातरम् के भाव को कांग्रेस या मुस्लिम लीग की तुलना में कहीं बेहतर तरीके से समझा। उन्होंने इसका उदाहरण देते हुए इतिहास के कई प्रसंगों का ज़िक्र किया।
उन्होंने यह भी कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का प्रेरणास्रोत रहा है, जिसमें सभी समुदायों ने योगदान दिया है।
निष्कर्ष
राजनाथ सिंह के संबोधन के दौरान हुआ यह विवाद संसद में एक बार फिर सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ती तकरार का संकेत देता है। हालांकि बाद में चर्चा सामान्य रूप से आगे बढ़ी, लेकिन उनकी टिप्पणी “कौन बैठाएगा मुझे” सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी रही।
Correspondent – Shanwaz khan


