पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में तृणमूल कांग्रेस के विधायक हुमायूं कबीर द्वारा 6 दिसंबर को ‘बाबरी मस्जिद’ नाम से नई मस्जिद का शिलान्यास करने की घोषणा ने बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। विवाद के बीच भी कबीर अपनी घोषणा पर अड़े हुए हैं और विरोध करने वालों को खुली चुनौती दे रहे हैं। उन्होंने यहां तक कहा है कि अगर कोई उनका सिर काटना चाहता है तो शिलान्यास समारोह में आ सकता है—वह “शहीद होने को तैयार” हैं।
कबीर का दावा: राम मंदिर का विरोध नहीं हुआ, फिर मस्जिद पर आपत्ति क्यों?
ANI से बातचीत में कबीर ने कहा कि बाबर के सेनापति ने 464 साल पहले बाबरी मस्जिद का निर्माण कराया था। बाद में “मस्जिद गिरा दी गई और राम मंदिर बना दिया गया, लेकिन किसी ने इसका विरोध नहीं किया।” उन्होंने तर्क दिया कि अगर राम मंदिर का निर्माण बिना विरोध के हो सकता है, तो बाबर के नाम पर मस्जिद बनने पर समस्या क्यों हो रही है।
कबीर ने कहा कि बाबर भारत के इतिहास का हिस्सा हैं और उनके नाम से मस्जिद बनाना कोई गैरकानूनी काम नहीं है। उन्होंने पूछा कि यदि सुप्रीम कोर्ट या गृह मंत्रालय ने इस संबंध में कोई रोक लगाई है तो उन्हें बताया जाए।
“सिर काटना है तो समारोह में आ जाओ” – विधायक की खुली चुनौती
अपने विवादित बयान को दोहराते हुए कबीर ने कहा कि उन्हें रोकने की कोशिश करने वाले शिलान्यास समारोह में आकर उनका सिर काटने की कोशिश कर सकते हैं। उन्होंने कहा, “मैं तैयार हूं। मैं शहीद होने को तैयार हूं, लेकिन बाबरी मस्जिद बनाकर रहेंगे।”
उनकी यह टिप्पणी राजनीतिक हलकों में बड़ी हलचल की वजह बनी हुई है।
TMC ने किया किनारा, बयान को बताया व्यक्तिगत राय
विवाद बढ़ने के बाद तृणमूल कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि हुमायूं कबीर का बयान पार्टी की आधिकारिक लाइन नहीं है।
टीएमसी के प्रदेश उपाध्यक्ष जय प्रकाश मजूमदार ने कहा कि यह कबीर का “निजी मामला” है और पार्टी का इससे कोई संबंध नहीं। उन्होंने कहा कि कबीर एक विधायक हैं और पार्टी के नाम पर चुनाव जीता है, लेकिन उनकी व्यक्तिगत योजनाओं और वक्तव्यों का तृणमूल कांग्रेस से कोई लेना-देना नहीं है।
केंद्रीय मंत्री का आरोप: हिंदुओं को डराने की कोशिश
केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने कबीर पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मस्जिद बनाना किसी का भी अधिकार है, परंतु “अगर बाबरी मस्जिद दोबारा बनेगी, तो राम मंदिर भी बनेगा।”
उन्होंने आरोप लगाया कि TMC और उसके विधायक मुर्शिदाबाद में हिंदुओं को डराने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि इस जिले में हिंदू अल्पसंख्यक हैं। मजूमदार ने कहा कि यह कदम धार्मिक उन्माद फैलाने की कोशिश है।
स्थानीय स्तर पर तनाव बढ़ने की आशंका
कबीर की घोषणा ऐसे समय में आई है जब 6 दिसंबर बाबरी मस्जिद विध्वंस की तारीख के कारण संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में उनके बयान और मस्जिद निर्माण के लिए चुनी गई तारीख ने प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को भी चौकन्ना कर दिया है।
विवाद आगे बढ़ सकता है
एक ओर कबीर का दावा है कि वह केवल धार्मिक स्थल का निर्माण कर रहे हैं, जो कानूनन गलत नहीं है। दूसरी ओर विपक्ष इसे राजनीतिक और धार्मिक ध्रुवीकरण की कोशिश बता रहा है। TMC की आधिकारिक दूरी और भाजपा का आरोप—दोनों ही इस विवाद को और गहरा बना रहे हैं।
मुर्शिदाबाद में आने वाले दिनों में हालात कैसे रहते हैं, यह काफी हद तक प्रशासन की तैयारी और राजनीतिक दलों के रुख पर निर्भर करेगा।
Correspondent – Shanwaz khan


