सीवान |
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की नामांकन प्रक्रिया के दौरान मंगलवार को सीवान जिले के दरौली विधानसभा क्षेत्र में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम हुआ।
महागठबंधन के प्रत्याशी और मौजूदा विधायक सत्यदेव राम को नामांकन दाखिल करने के कुछ ही मिनट बाद पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इस अप्रत्याशित कार्रवाई से राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई और समर्थकों में अफरातफरी फैल गई।
नामांकन के बाद अचानक हिरासत
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, विधायक सत्यदेव राम ने नामांकन पर्चा दाखिल करने के बाद जैसे ही समाहरणालय परिसर से बाहर कदम रखा, पहले से मौजूद पुलिस दल ने उन्हें रोक लिया।
पुलिस अधिकारियों ने उनसे संक्षिप्त बातचीत की और फिर हिरासत में लेकर थाने ले जाया गया। इस कार्रवाई से现场 (मौके) पर हड़कंप मच गया। समर्थकों ने नारेबाजी करते हुए इसे “राजनीतिक साजिश” बताया।
20 साल पुराना मामला बना गिरफ्तारी की वजह
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सत्यदेव राम की गिरफ्तारी किसी नए मामले में नहीं बल्कि साल 2005 के रेल रोको आंदोलन से जुड़ी है।
उस वक्त दरौंदा रेलवे स्टेशन पर बिना अनुमति रेल सेवा बाधित करने के आरोप में कांड संख्या 36/2005 दर्ज की गई थी।
सुनवाई के दौरान सत्यदेव राम कई बार अदालत में पेश नहीं हुए, जिसके चलते सोनपुर रेलवे कोर्ट ने उनके खिलाफ स्थायी वारंट जारी किया था।
नगर थाना पुलिस ने इसी वारंट के आधार पर मंगलवार को यह कार्रवाई की।
सत्यदेव राम बोले— “यह राजनीतिक साजिश है”
गिरफ्तारी के बाद मीडिया से बातचीत में विधायक ने कहा —
“मुझे इस केस की कोई जानकारी नहीं थी। मैं सिर्फ नामांकन करने आया था, लेकिन बाहर निकलते ही पुलिस ने पकड़ लिया। यह साफ तौर पर राजनीतिक दबाव में की गई कार्रवाई है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल उनकी बढ़ती लोकप्रियता से डर गए हैं, इसलिए उनकी छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है।
प्रशासन ने कहा— “कानूनी प्रक्रिया का पालन”
इस पर सीवान एसपी मनोज कुमार तिवारी ने कहा कि यह गिरफ्तारी पूरी तरह कानूनी है।
“सत्यदेव राम के खिलाफ सोनपुर रेलवे कोर्ट से स्थायी वारंट जारी था। उसी वारंट के अनुपालन में कार्रवाई की गई है। चुनावी प्रक्रिया से इसका कोई संबंध नहीं है,”
एसपी ने कहा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि “कोर्ट के आदेश का पालन करना प्रशासन का दायित्व है, चाहे चुनाव हों या नहीं।”
राजनीतिक प्रतिक्रिया और प्रदर्शन
गिरफ्तारी की खबर फैलते ही महागठबंधन के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में समाहरणालय परिसर के बाहर जुट गए।
उन्होंने “सत्यदेव राम को रिहा करो” के नारे लगाए और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया।
राजद और वामपंथी दलों ने इस कार्रवाई को “राजनीतिक बदले की कार्रवाई” बताया, जबकि जेडीयू और बीजेपी ने कहा कि कानून अपना काम कर रहा है और इसमें राजनीति देखना अनुचित है।
चुनावी असर और आयोग की निगरानी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना दरौली विधानसभा सीट की चुनावी दिशा पर असर डाल सकती है।
यह सीट पहले से ही महागठबंधन और एनडीए दोनों के लिए प्रतिष्ठा की बनी हुई है।
सूत्रों के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी चुनाव आयोग को भी भेजी गई है, जो यह जांच करेगा कि गिरफ्तारी से चुनावी प्रक्रिया प्रभावित तो नहीं हुई।
निष्कर्ष
सत्यदेव राम की गिरफ्तारी ने बिहार चुनाव 2025 के शुरुआती चरण में ही सियासी पारा चढ़ा दिया है।
जहां एक ओर प्रशासन इसे “कानून की जीत” बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे “लोकतंत्र पर प्रहार” करार दे रहा है।
अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि कोर्ट में उनकी पेशी के बाद क्या रुख सामने आता है और यह मामला आगे चुनावी समीकरणों को किस दिशा में ले जाता है।


